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फुटपाथ पर ‘कब्जा’, सड़क पर मुंबईकर!

 -मनपा का ‘पेडेस्ट्रियन फर्स्ट’ अभियान कागजों तक; जमीन पर पैदल चलने की जगह ही गायब

फिरोज खान / मुंबई

मुंबई में पैदल चलने वालों को सुरक्षित और बाधामुक्त रास्ता देने के लिए मनपा ने ‘पेडेस्ट्रियन फर्स्ट’ अभियान शुरू किया है, लेकिन शहर के कई हिस्सों में हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। कहीं फुटपाथ पर फेरीवालों का कब्जा है, कहीं गाड़ियां खड़ी हैं तो कहीं गैरेज, झोपड़ियां, पाइप और मवेशियों के तबेलों ने पैदल चलने की जगह ही निगल ली है। नतीजा यह है कि मुंबईकर फुटपाथ छोड़कर सीधे सड़क पर चलने को मजबूर हैं।
मनपा ने करीब ३२० किलोमीटर फुटपाथों से अतिक्रमण और अन्य बाधाएं हटाने का लक्ष्य रखा है। मनपा के मुताबिक, २९ अगस्त तक १३४ हिस्सों में करीब १९७ किलोमीटर फुटपाथ पर कार्रवाई की जा चुकी है। लेकिन इन दावों और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
दादर से मारोल तक फुटपाथ पर कब्जा
दादर स्टेशन के सामने करीब ४ मीटर चौड़ा फुटपाथ लगभग २२ मीटर के हिस्से में करीब ३० फेरीवालों से घिरा हुआ है। यहां पैदल यात्रियों के लिए चलने की जगह लगभग खत्म हो गई है।
चेंबूर के एन.जी. आचार्य मार्ग पर ४ मीटर चौड़े फुटपाथ में से केवल १.८ मीटर हिस्सा ही पैदल चलने के लिए बचा है। यह इलाका गैर-फेरीवाला क्षेत्र घोषित होने के बावजूद करीब १० मीटर के हिस्से में लगभग १० स्टॉल लगे हुए हैं।
चेंबूर के शेल कॉलोनी इलाके में स्थिति और गंभीर है। करीब ३.२ मीटर चौड़े फुटपाथ के लगभग १०० मीटर हिस्से पर झोपड़ियां, करीब १२ गायों का तबेला, घरेलू सामान और पाइप होने के कारण पैदल चलने का रास्ता पूरी तरह बाधित है। जागृति नगर में ४ मीटर चौड़े फुटपाथ पर सिर्फ १.४ मीटर जगह पैदल यात्रियों के लिए बची थी। वहीं मारोल नाका में ५.३ मीटर चौड़े फुटपाथ पर करीब १५ स्टॉल और दोपहिया वाहनों के कारण केवल १.६ मीटर हिस्सा ही चलने के लिए उपलब्ध था।

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