भरोसा

जिन रिश्तों का मोल नहीं होता,
वो दर्द के किस्से होते हैं।
मतलब से जो बंधे रिश्ते हैं,
वो बस दिखावे होते हैं।
ईमानदारी गर व्यवहार में हो,
वही वफादारी कहलाती है,
स्वार्थ के लिए बने रिश्ते,
वो बेवफाई कहलाती है।
जो बुनियाद रखी झूठ पे,
वो महज दिखावे होते हैं,
दिल से जो जुड़े न हों रिश्ते,
वो बनावटी से होते हैं।
विश्वास के सहारे जीते हैं सब,
मगर जब टूटता है भरोसा,
सांस तो चलती रहती है,
पर दिल फिर नहीं संभलता है।
-मुनीष भाटिया
मोहाली

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