एक वह शब्द होता है
भरोसा, जो सब समाप्त होने के बाद भी
खोलता है रास्ता
ले जाता है उधर
जिधर है मंजिल।
भरोसा टूटता है मगर
जुड़ जाता है नया भरोसा
आगे बढ़ने के लिए।
और भरोसे के साथ
होने लगती है शुभ यात्रा जीवन की।
भरोसा आग में घी डालते हुए बढ़ता है।
समय को पढ़ता है।
सीढियां चढ़ता है।
भरोसा आधार है
पूरा सरोकार है
तुम्हारा सबसे भरोसेमंद यार है
उसका दूसरा नाम एतबार है।।
-अन्वेषी
