राजेश सरकार / प्रयागराज
गुरुद्वारा नैनी संगत में सिखों के पहले गुरु गुरु नानकदेव का 557वां प्रकाश उत्सव रविवार को श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। प्रकाश उत्सव की खुशियां चारों दिशा में छाई रही। श्री अखंड पाठ साहिब के समापन के बाद गुरुद्वारा गुरबाणी से सराबोर हो रहा था। साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे संगतो का मत्था टेककर आशीर्वाद लेने वालों का सिलसिला बराबर चलता रहा। नैनी गुरुद्वारा फूलों से आकर्षक दीवान सजाया गया था। संगत द्वारा गुरु नानकदेव के प्रकाश उत्सव पर कई दिनों से धार्मिक आयोजन हो रहे थे। रागी जत्थों ने शब्द-कीर्तन सुना कर संगत को निहाल किया। गुरुद्वारे में गुरु नाम की गूंज होती रही। गुरु का आशीष सहेजने के लिए लोगों ने गुरुद्वारे में माथा टेककर व सेवा करने का कार्य प्रातः काल से देर रात तक किया। संगत देर रात तक चलती रही। साहिब श्री गुरु नानकदेव के जीवन इतिहास से संगत को अवगत कराते हुए साहिब श्री के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया। कथा, कीर्तन, आरती, अरदास, हुकमनामा के बाद गुरु का अटूट लंगर रविवार को चलाया गया जिसमें सभी संप्रदाय के लोगों ने बिना किसी भेदभाव के एक पंक्ति में बैठकर गुरु का लंगर छका। दिन भर विभिन्न जाति व धर्म के लोगों ने गुरुद्वारा पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेक का आशीर्वाद लिया। प्रकाश उत्सव में परमिंदर सिंह बंटी, सुरेंद्र सिंह,ज्ञानी जसपाल सिंह, सरदार पतविंदर सिंह, लखविंदर सिंह, राजू चढ़ा, कमल गुलाटी, हरप्रीत कौर, किरण रूपिंदर कौर, सतनाम सिंह, प्रितपाल सिंह, अवीन सहित बड़े बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी धर्म संप्रदाय के बड़ी संख्या में सेवादार मौजूद रहे।
