सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई समेत पूरे राज्य में मॉल्स में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। इसे लेकर विधान परिषद में जब विपक्षी सदस्यों ने जोरदार तरीके से महायुति सरकार को घेरना शुरू किया तो राज्य सरकार ने फायर सेफ्टी को लेकर सख्त रुख अपनाया। साथ ही सरकार ने कहा है कि आनेवाले ९० दिनों के भीतर सभी मॉल्स का फायर ऑडिट पूरा करना अनिवार्य होगा। इस आशय के आदेश सभी महानगरपालिकाओं को दिए जाएंगे। इसके बाद भी जो मॉल्स सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनकी बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी जाएगी।
इस तरह का स्पष्ट संकेत उद्योग मंत्री उदय सामंत ने विधान परिषद में दिया। विभिन्न शहरों के मॉल्स को अनुमति देते समय हो रही अनियमितताओं और बढ़ती आग की घटनाओं के संदर्भ में यह प्रश्न सदस्य कृपाल तुमाने ने उठाया था। साथ ही विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने पिछली बार मॉल में लगी आग के बाद ७५ मॉल्स की अग्नि सुरक्षा जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने मुद्दा उठाया था कि इन मॉल्स में से २६ मॉल्स को नोटिस भेजी गई थी। केवल नोटिस देना पर्याप्त नहीं है, इनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं होती? इस पर मंत्री सामंत ने बताया कि मुंबई में एक मॉल में लगी बड़ी आग के बाद पहले ही मुंबई महानगरपालिका ने सभी मॉल्स का फायर ऑडिट करने के आदेश जारी किए हैं। कानून के प्रावधानों के अनुसार, कार्रवाई की जाती है। ७५ मॉल्स में से ५ से ६ मॉल्स पर सख्त कार्रवाई की गई है, जबकि बाकी मॉल्स बंद हैं। आगे से मॉल्स में अग्नि सुरक्षा को लेकर कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सभी श्रेणी की मनपाएं भी शामिल
राज्य की सभी श्रेणी ‘ब’, ‘क’ और ‘ड’ की महानगरपालिकाओं को मॉल्स की अग्नि सुरक्षा जांच को लेकर आदेश जारी किए जाएंगे। अन्यथा, महाराष्ट्र आग प्रतिबंधक व जीवन सुरक्षा अधिनियम २००६ की धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की जानकारी भी मंत्री सामंत ने दी। इस चर्चा में सदस्य अभिजीत वंजारी ने भी भाग लिया।
