अमिताभ श्रीवास्तव
कभी-कभी आदमी की पसंद उसकी जान का दुश्मन भी बन जाती है। अब देखिये न, जो उसे पसंद था वही उसकी मौत का कारण बना। बेस जंपिंग में कुशल और अपनी इस कुशलता को वह टीवी पर लाइव दर्शाती भी थी मगर ऐसा ही एक साहसिक कार्य करते हुए वो मारी गर्इं। ‘एड्रेनालाईन वुमेन’ के नाम से प्रसिद्ध ३४ वर्षीय मार्टा जिमेनेज बेस जंपिंग दुर्घटना में मारी गर्इं। मार्टा एक लोकप्रिय टीवी एंकर भी थीं। दुनिया उन्हें सकारात्मकता और साहसिक कार्यों के लिए बहुत प्यार करती थी। उनके चैट शो के सहकर्मियों का कहना है कि उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी। मार्टा ने चैट शो एल होर्मिगुएरो, जिसका अर्थ है ‘चींटी का टीला’- पर काम किया था जिसने स्पेन भर के लाखों दर्शकों को प्रभावित किया था। पिछले रविवार वह उत्तर-पूर्वी शहर हुएस्का के पास चिस्टाउ घाटी में बेस जंपिंग करने गई थीं। लेकिन अभियान बुरी तरह फेल हो गया और मार्टा के साथ दुर्घटना घटी, हालांकि दुर्घटना वैâसे हुई, मार्टा की मौत वैâसे हुई? अभी तक इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है। यूं तो बचाव दल ने तेजी से काम किया था, लेकिन वे उसे बचाने के लिए कुछ नहीं कर सके। एक हेलिकॉप्टर घटनास्थल पर पहुंचा, जहां उन्हें मार्टा का शव मिला। मार्टा को पोस्टमार्टम के लिए हुएस्का स्थित कानूनी चिकित्सा संस्थान ले जाया गया। मार्टा के शो के होस्ट पाब्लो मोटोस ने कहा, ‘मार्टा हमें छोड़कर चली गई है, वह एड्रेनालाईन महिला थी, उसने अपना जीवन उस काम को करते हुए खो दिया, जिसे वह सबसे अधिक पसंद करती थी।’ इस खबर ने शो की टीम के साथ-साथ इसके दर्शकों को भी हिलाकर रख दिया है।
पंचतत्व में विलीन हुए ‘शताब्दीवीर’ फौजा सिह
दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक का खिताब हासिल करने वाले प्रतिष्ठित धावक फौजा सिंह का सोमवार को ११४ साल की उम्र में एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। सोमवार दोपहर जालंधर-पठानकोट हाईवे पर एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी थी। इस मामले में पुलिस ने मंगलवार रात अमृतपाल सिंह ढिल्लों को गिरफ्तार कर लिया है, जो हाल ही में कनाडा से लौटा था। दुर्घटना के समय एसयूवी वही चला रहा था। १ अप्रैल, १९११ जालंधर के ब्यास पिंड में जन्मे फौजा सिंह ५ साल की उम्र तक चल भी नहीं पाते थे। १९९२ में अपनी पत्नी जियान कौर के निधन के बाद वे अपने बेटे के साथ इंग्लैंड चले गए और पूर्वी लंदन में बस गए। फौजा ने अगस्त १९९४ में अपने ५वें बेटे कुलदीप सिंह की मौत के बाद दुख से उबरने के लिए ८३ साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया था। ८९ साल की उम्र में उन्होंने दौड़ को गंभीरता से लिया और उसी साल लंदन मैराथन को ६ घंटे ५४ मिनट में पूरा कर सुर्खियां बटोर लीं। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जल्द ही युवाओं और बुजुर्गों की प्रेरणा बन गए। १६ अक्टूबर, २०११ को ओंटारियो मास्टर्स एसोसिएशन इनविटेशनल मीट में मैराथन पूरा करने वाले वे दुनिया के पहले ‘शताब्दीवीर’ बने। इस उपलब्धि ने उन्हें सबसे उम्रदराज मैराथन धावक बना दिया। उन्होंने टोरंटो वाटरप्रâंट मैराथन ८ घंटे, ११ मिनट और ६ सेकंड में पूरी की थी। इस उपलब्धि से पहले उन्होंने टोरंटो के बिर्चमाउंट स्टेडियम में उसी इवेंट में एक ही दिन में आठ विश्व आयु-समूह रिकॉर्ड बनाए थे।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)
