अमिताभ श्रीवास्तव
पहले उपकप्तान बनाए जाने पर लोगों ने जमकर आलोचना शुरू कर दी थी मगर देखो किस्मत कि मैच में कप्तानी भी कर डाली। जी हां, वैभव सूर्यवंशी दलीप ट्रॉफी के दौरान ईस्ट जोन टीम के कप्तान बन गए हैं। कल से दलीप ट्रॉफी के दोनों सेमीफाइनल मुकाबले शुरू हो गए हैं, जहां ईस्ट जोन का सामना सेंट्रल जोन से हो रहा है। ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन चोट के कारण मैदान से बाहर चले गए थे, ऐसे में वैभव ने मैदान पर टीम की कप्तानी का जिम्मा अपने कंधों पर लिया। टूर्नामेंट शुरू होने से पूर्व १५ साल के वैभव सूर्यवंशी को ईस्ट जोन टीम का उपकप्तान बनाया गया था। इसलिए जब ईशान मैदान से बाहर चले गए, तो वैभव ने उपकप्तान होने के नाते जिम्मेदारी संभाली। इस सेमीफाइनल मुकाबले में सेंट्रल जोन की टीम पहले बैटिंग कर रही है। पारी के १९वें ओवर में विकेटकीपिंग करते समय गेंद ईशान किशन की दायीं कलाई पर लग गई थी। मैदान पर फिजियो द्वारा जांच के बाद कप्तान किशन को बाहर जाना पड़ा। ड्रेसिंग रूम में वापस लौटने के बाद उन्होंने हाथ पर पट्टी बांधी। उनकी जगह विकेटकीपिंग कुमार कुशाग्र और कप्तानी वैभव सूर्यवंशी ने संभाली। जब ईस्ट जोन का स्क्वॉड घोषित हुआ था, तब १५ वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को उपकप्तानी जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने के पैâसले की खूब आलोचना हुई थी।
बैकअप पॉवर में तिलक
लीजिये बैकअप पॉवर खोजा जा रहा है। जी हां, अगले साल होने वाले ओडीआई वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया ने बैकअप प्लान पर काम शुरू कर दिया है। सबसे ज्यादा माथापच्ची मिडिल ऑर्डर को लेकर है, जहां श्रेयस अय्यर के विकल्प की तलाश की जा रही है। इसी रेस में तिलक वर्मा का नाम सामने आया है। टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ता तिलक को टॉप-६ में अय्यर के बैकअप के तौर पर विचार कर रहे हैं। बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के कारण तिलक मौजूदा बल्लेबाजी क्रम में जरूरी संतुलन भी ला सकते हैं। इतना ही नहीं, टीम मैनेजमेंट उनकी ऑफ स्पिन को भी निखारना चाहता है, ताकि वह जरूरत पड़ने पर एक उपयोगी गेंदबाजी विकल्प बन सकें। हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल को लगता है कि मिडिल ऑर्डर के लिए फिलहाल कोई ऐसा बैकअप तैयार नहीं है जिस पर बड़े टूर्नामेंट में भरोसा किया जा सके। सबसे बड़ी चिंता ऑलराउंड विकल्पों को लेकर है। हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी की खराब फिटनेस को देखते हुए टीम ऐसा खिलाड़ी चाहती है, जो टॉप-६ में बल्लेबाजी करने के साथ जरूरत पर करीब चार ओवर भी निकाल सके। पिछले कुछ समय में भारतीय टीम को प्लेइंग इलेवन का संतुलन बनाने के लिए अक्षर पटेल या वॉशिंगटन सुंदर को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजना पड़ा है। टीम मैनेजमेंट अब इस तरह के समझौते से बचना चाहता है। भारतीय टॉप ऑर्डर में दाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या अधिक है। ऐसे में तिलक वर्मा का शामिल होना विपक्षी टीमों के लिए गेंदबाजी का एंगल और रणनीति बदलने की चुनौती पैदा कर सकता है। टीम मैनेजमेंट उनकी ऑफ स्पिन को भी गंभीरता से देख रहा है। अगर तिलक लगातार अपनी गेंदबाजी पर काम करते हैं और चार ओवरों का भरोसेमंद विकल्प बन जाते हैं, तो वह वनडे टीम के कॉम्बिनेशन में काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)
