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पंचनामा : लोकल के ट्रैक बने खूनी ट्रैक! ….१५ साल में मिले १४ हजार से ज्यादा अज्ञात शव

-परिजनों को मुआवजा न देने से रेलवे को करोड़ों का फायदा

जेदवी

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रतिदिन अनगिनत यात्री लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। मुंबई की लाइफ लाइन कही जानेवाली लोकल जहां रोजाना लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं, वहीं लोकल ट्रेनों के ट्रैकों पर छिपे एक खौफनाक सच का खुलासा एक हालिया आरटीआई में हुआ है, जिसमें पिछले १५ वर्षों में मुंबई उपनगरीय रेल मार्गों पर १४,००० से अधिक अज्ञात शव बरामद हुए हैं।
हर तीसरी मौत बेनाम
रेलवे रिकॉर्ड के मुताबिक, ट्रैकों पर हुई कुल मौतों में से करीब एक-तिहाई मामले ऐसे हैं, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो पाई है। इन शवों में ज्यादातर मजदूर वर्ग, बेघर या मानसिक रूप से अस्वस्थ लोग होते हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाती है। बता दें कि रेलवे दुर्घटना में मृतक के परिजन रेलवे से मुआवजे की मांग करते हैं। रेलवे को भारी रकम मुआवजे के तौर पर चुकानी पड़ती है, लेकिन शवों की पहचान न होने पर रेलवे को कोई भुगतान नहीं करना पड़ता है।
लावारिस रह जाते हैं शव
अज्ञात शवों की अधिकतर घटनाएं दादर, कुर्ला, ठाणे, अंधेरी, बोरीवली और मीरा रोड जैसे व्यस्त इलाकों में दर्ज हुईं। रेलवे पुलिस के अनुसार, हर बार प्रक्रिया एक जैसी होती है। ट्रेन रुकती है, लोकोपायलट सूचना देता है, जीआरपी और आरपीएफ मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा करती है। अक्सर शव इतने क्षतिग्रस्त होते हैं कि चेहरा पहचानना मुश्किल होता है। कपड़ों के टुकड़े, टूटा मोबाइल या फटा टिकट ही एकमात्र सुराग बनते हैं। इन शवों की पहचान न होने के कारण ज्यादातर शव लावारिस रह जाते हैं।
रेलवे की सफाई और पुलिस की चुनौती
जीआरपी के एक अधिकारी ने बताया कि ‘हम हर शव की फोटो खींचकर थानों में चिपका देते हैं, लेकिन पहचान की संभावना बहुत कम होती है।’ रेलवे अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटनाएं अक्सर ट्रैक पार करने, भीड़ या मोबाइल में ध्यान भटकने से होती हैं।

पश्चिम रेलवे की जनसंपर्क अधिकारी श्रीमती स्मिता के अनुसार, लावारिस शवों की अंतिम क्रिया जीआरपी द्वारा की जाती है। रेलवे दुर्घटना में मृतक के परिवार को कितना मुआवजा दिया जाता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि मुआवजे की तय राशि नहीं होती है। परिजनों के क्लेम के आधार पर जांच की जाती है और उसके बाद ही मुआवजा दिया जाता है।

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