-अरुण कुमार गुप्ता
दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने जदयू एमएलसी नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अनंत सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस हत्याकांड में फंसाने और जेल भिजवाने के पीछे नीरज कुमार की साजिश है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद नीरज कुमार ही मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए। पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एक दिसंबर तक आत्मसमर्पण करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में उन्हें फिर से जमानत मिल जाएगी। अनंत सिंह ने कहा कि उन्होंने जदयू या सरकार का विरोध नहीं किया था, बल्कि उनका विरोध केवल नीरज कुमार से था। उनके मुताबिक, इसी राजनीतिक टकराव के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर नीतीश कुमार की तबीयत ठीक रहती तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। दूसरी ओर, नीरज कुमार ने अनंत सिंह के आरोपों को खारिज किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नया सवाल खड़ा कर दिया है। क्या यह केवल कानूनी लड़ाई है या इसके पीछे जदयू की अंदरूनी राजनीतिक खींचतान भी है? फिलहाल दोनों नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली सच्चाई का पैâसला जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही सामने आएगा।
शिक्षकों ने भाजपा को दिखाया आईना!
बिहार विधान परिषद के पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे ने भाजपा को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है। करीब तीन दशक से इस सीट पर कायम पार्टी का दबदबा इस बार खत्म हो गया। भाजपा के दिग्गज नेता और लगातार पांच बार जीत दर्ज कर चुके नवल किशोर यादव को राष्ट्रीय जनता दल के डॉ. संजीव कुमार ने शिकस्त दे दी। इस नतीजे को केवल एक चुनावी हार नहीं, बल्कि शिक्षक मतदाताओं के बीच बदलते राजनीतिक रुझान के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। तीन दशक से जिस सीट को भाजपा अपना मजबूत राजनीतिक आधार मानती रही, वहां मतदाताओं ने इस बार अलग फैसला सुनाया। इस नतीजे ने भाजपा के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शिक्षक समुदाय पार्टी के स्थानीय नेतृत्व से नाराज था? क्या शिक्षकों की समस्याओं, सेवा शर्तों, वेतन, पेंशन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली? या फिर उम्मीदवार और संगठन के बीच तालमेल की कमी चुनावी परिणाम पर भारी पड़ी? सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी एनडीए उम्मीदवार आनंद पुष्कर की निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज के हाथों हार ने गठबंधन के लिए चिंता बढ़ाई है। लेकिन पटना का परिणाम भाजपा के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश जरूर है। शिक्षक मतदाता केवल परंपरागत राजनीतिक समर्थन के आधार पर वोट नहीं करते। वे अपने पेशे, सम्मान, अधिकार और समस्याओं से जुड़े सवालों पर भी फैसला सुनाते हैं।
एमएलसी चुनाव के बाद
जदयू में अंदरूनी खींचतान!
बिहार में एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर राजनीतिक हलचल तेज होने की चर्चा है। चुनावी नतीजों के साथ ही पार्टी के कुछ नेताओं के बीच बयानबाजी और मतभेदों की खबरों ने संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर नीरज कुमार और ललन सिंह से जुड़े विवाद ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एमएलसी चुनाव किसी भी राजनीतिक दल के लिए केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि संगठन की जमीनी पकड़ और नेताओं के आपसी तालमेल की परीक्षा भी होते हैं। ऐसे में चुनाव के बाद सामने आ रही बयानबाजी ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य है? अब सवाल यह है कि चुनाव परिणामों की समीक्षा केवल उम्मीदवारों और रणनीति तक सीमित रहेगी या संगठन के भीतर जिम्मेदारियों और नेतृत्व को लेकर भी मंथन होगा। क्या जदयू इन मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझा पाएगा या आने वाले दिनों में यह खींचतान और सार्वजनिक होगी? बिहार की राजनीति में जदयू की भूमिका को देखते हुए पार्टी के भीतर की यह हलचल महत्वपूर्ण है।
