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सत्ता की राजनीति बेनकाब… ‘ऑपरेशन कमल’ की दहशत से शिंदे गुट में मच गई है भगदड़!

-भाजपा के दोस्त भी असुरक्षित, शिंदे को नगरसेवक छिपाने पड़े

-कांग्रेस का आरोप, भाजपा ने विपक्ष तोड़ा, अब सहयोगी भी डरे

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में सत्ता की राजनीति बेनकाब हो चुकी है। जिस ‘ऑपरेशन कमल’ के जरिए भाजपा ने वर्षों तक विपक्षी दलों को तोड़कर सत्ता का खेल खेला, उसी की दहशत अब उसके सहयोगी दलों तक पहुंच गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि शिंदे गुट में भगदड़ मची हुई है और अपने ही जीते हुए नगरसेवकों को सुरक्षित ठिकानों पर छिपाने की नौबत आ गई है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ने पहले विपक्ष को तोड़ा और अब वही तोड़-फोड़ की राजनीति उसके सहयोगियों को भी असुरक्षित बना रही है। सत्ता के इस खेल में भरोसे की जमीन खिसक चुकी है और राजनीतिक अस्थिरता खुलकर सामने आ गई है।
सत्ताधारी महायुति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा है कि महानगरपालिका चुनाव में पुलिस, प्रशासन और चुनाव आयोग के दबाव में साम-दाम-दंड-भेद की नीति का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया, फिर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिना डगमगाए संघर्ष किया और जीत दर्ज की। अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में हुए इस चुनाव में मुंबई में कांग्रेस को मिली सफलता भले ही संख्यात्मक रूप से बड़ी न हो, लेकिन इसे आत्मविश्वास बढ़ानेवाली और संगठन को ऊर्जा देने वाली जीत बताया गया है।
काम नहीं आया तोड़-फोड़, दल-विभाजन जैसे हथकंडे
राजीव गांधी भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा ने विपक्षी दलों को खत्म करने की सुनियोजित रणनीति अपनाकर उम्मीदवारों की तोड़-फोड़, दल-विभाजन और आर्थिक संसाधनों को रोकने जैसे हथकंडे इस्तेमाल किए। इसके बावजूद कांग्रेस ने १५२ उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिनमें से २४ उम्मीदवार निर्वाचित हुए।
कमजोर नहीं पड़ा है मनोबल
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि इस परिणाम से कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर नहीं पड़ा है। पार्टी ने आत्ममंथन और संगठन को और मजबूत करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई आगे भी पूरी ताकत से जारी रहेगी। वंचित बहुजन आघाड़ी को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस ने कहा कि उन्हें उनकी मांग के अनुसार सीटें दी गई थीं, लेकिन कुछ स्थानों पर उम्मीदवार उपलब्ध न होने के कारण मित्रतापूर्ण मुकाबले हुए। बेहतर समन्वय होता तो परिणाम और प्रभावी हो सकते थे।

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