– मुगलों से अंग्रेजों तक बदली हुकूमत
– ‘रिजीम चेंज’ पर सत्ताधारी बौखलाए हुए क्यों हैं?
भारत का इतिहास सत्ता परिवर्तन, शासन-व्यवस्थाओं के उत्थान और पतन तथा राजनीतिक बदलावों का इतिहास रहा है। कभी मुगलों का शासन रहा, कभी अंग्रेजों की हुकूमत चली और फिर लंबे स्वतंत्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को भारत आजाद हुआ। आजाद भारत में भी जनता ने चुनावों के जरिए अलग-अलग दलों को सत्ता सौंपी। इसके बावजूद आज ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता या शासन में बदलाव की चर्चा पर सियासी घमासान खड़ा होना कई सवाल पैदा करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की ओर से विपक्ष की ‘रिजीम चेंज’ संबंधी बातों को लेकर जताई जा रही चिंता के बीच बुनियादी सवाल यह है कि क्या किसी सरकार को बदलने की लोकतांत्रिक मांग अपने आप में असंवैधानिक है? या फिर इस शब्द के पीछे किसी ऐसी राजनीतिक व्यवस्था को बदलने का आशय है, जिसे लेकर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग व्याख्या है? मौजूदा विवाद में इसी अंतर को समझना जरूरी है।
मुगलों से अंग्रेजों तक बदलती रही सत्ता
भारतीय इतिहास में अलग-अलग राजवंशों और शासकों का उदय तथा पतन होता रहा। मुगल सत्ता का प्रभाव घटा, अंग्रेजों का औपनिवेशिक शासन स्थापित हुआ और अंततः स्वतंत्रता आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत को भारत छोड़ने पर मजबूर किया। वर्ष १९४७ का सत्ता हस्तांतरण महज एक सरकार का बदलना नहीं था, बल्कि विदेशी औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्र राष्ट्र बनने का ऐतिहासिक परिवर्तन था।
हालांकि, इतिहास के इन बड़े बदलावों और आज के लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए होने वाले सत्ता परिवर्तन में फर्क भी है। अंग्रेजी शासन का अंत स्वतंत्रता संघर्ष का परिणाम था, जबकि आजाद भारत में सरकार बदलने का संवैधानिक रास्ता चुनाव है। इसलिए हर बदलाव को एक ही अर्थ में देखना सही नहीं होगा।
कांग्रेस की सत्ता भी बदली
आजादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस का केंद्र की राजनीति में वर्चस्व रहा। लेकिन १९७७ में आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और जनता पार्टी की सरकार बनी। १९८९ में भी कांग्रेस बहुमत से दूर रही और केंद्र में दूसरी सरकार बनी। २०१४ में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया और केंद्र की सत्ता में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ। इन घटनाओं से एक लोकतांत्रिक तथ्य सामने आता है कि कोई भी राजनीतिक दल हमेशा के लिए सत्ता का मालिक नहीं होता। जनता का जनादेश बदल सकता है और सरकारें आ-जा सकती हैं। सत्ता में बने रहना किसी दल का स्थायी अधिकार नहीं, बल्कि मतदाताओं के समर्थन पर निर्भर राजनीतिक स्थिति है।
‘रिजीम चेंज’ पर विवाद की असली वजह क्या?
अक्टूबर २०२६ में विपक्ष के कुछ नेताओं और प्रदर्शनकारियों की ओर से ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल के बाद भाजपा ने आरोप लगाया है कि विपक्ष का उद्देश्य केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि उसे अस्थिर करना है। दूसरी ओर, कांग्रेस के नेताओं ने लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार बदलने की मांग को विपक्ष के अधिकार से जोड़ा है। लोकतंत्र में असली कसौटी यही है कि सत्ता किसके पास है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि सत्ता हासिल करने और उसे छोड़ने के नियम क्या हैं। यदि सरकार बदलने की मांग चुनाव और संविधान के दायरे में है, तो उसे केवल सत्ता परिवर्तन की मांग होने के कारण अलोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता।
