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महामृत्युंजय मंत्र जाप में सावधानियां

महामृत्युंजय मंत्र का जप करना मनुष्य के लिये परम फलदायी और कल्याणकारी माना गया हैं। लेकिन महामृत्युंजय मंत्र का जप कुछ सावधानियाँ रख कर करना चाहिए। जिससे मंत्र का संपूर्ण लाभ प्राप्त हो सके और किसी भी प्रकार के अनिष्ट की संभावना न रहें।
इस लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से पूर्व निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।
१. साधक को महामृत्युंजय मंत्र का जो भी मंत्र जपना हो उसका उच्चारण पूर्ण शुद्धता से करें।
२. मंत्र जप एक निश्चित संख्या में करें। पूर्व दिवस में जपे गए मंत्रों से, आगामी दिनों में कम संख्या में मंत्रों का जप नहीं करना चाहिए। यदि चाहें तो अधिक संख्या में जप सकते हैं।
३. विशेष प्रयोजन के किए जा रहे मंत्र का उच्चारण होठों से बाहर नहीं जाना चाहिए। यदि अभ्यास न हो तो धीमे स्वर में जप करें।
४. जप काल में धूप और दीप
कब करें महामृत्युंजय मंत्र जाप?
शास्त्रोक्त विधान के अनुशार महामृत्युंजय मंत्र जप से अकाल मृत्यु तो टलने के उपरांत आरोग्यता की भी प्राप्ति होती हैं।
यदि स्नान करते समय शरीर पर पानी डालते समय महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से स्वास्थ्य-लाभ होता हैं।

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