-पानी में जाकर पूजा करने को लेकर मनपा अधिकारियों के हां और न से भक्तों में असमंजस
अमर झा / भायंदर
मीरा-भायंदर में उत्तर भारत का प्रमुख त्योहार छठ पूजा की तैयारी जोर शोर से चल रही है ।इस वर्ष 26 अक्टूबर को खारना पूजा, 27 अक्टूबर को शाम का अर्ध और 28 अक्टूबर को सुबह का अर्ध भगवान सूर्य को देकर पूजा की समाप्ति की जाएगी। मीरा भायंदर में लगभग छह से सात जगहों कशिगांव, पेकर पाड़ा, सीवर गार्डन, भायंदर-पश्चिम एवं भायंदर-पूर्व पर छठ पूजा का आयोजन अलग अलग संस्थाओं द्वारा किया जाता है, जिसमें जेसल पार्क चौपाटी पर बिहारी छठ पूजा संस्था, मीरा-भायंदर द्वारा पिछले पच्चीस वर्षों से पूजा का आयोजन किया जाता है। जेसल पार्क चौपाटी पर जगह अधिक होने के कारण लगभग 10 से 15 हजार भक्त यहां पूजा कार्यक्रम में शामिल होने आते हैं। संस्था द्वारा महिला व्रती के लिए पूजा स्थल पर कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रुम बनाया जाता है, रात में भंडारा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सुबह व्रतियों के लिए नारियल पानी का इंतजाम किया जाता है।जबकि सूर्या ज्योति फाउंडेशन द्वारा भक्तों के लिए चाय पानी एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था किया जाता है।
दूसरी तरफ मनपा की उदासीन रवैया से आयोजकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।बिहारी छठ पूजा संस्था के अध्यक्ष शंकर झा का कहना है कि छठ पूजा का परमिशन एक महीना पहले ही हर वर्ष मिल जाता था, लेकिन इस बार मनपा प्रशासन किसी राजनीतिक दबाव में आकर आयोजन का परमिशन देने में काफी समय तक टाल मटोल करते रही।हालांकि, अंततः मनपा ने परमिशन दिया अभी भी कार्यक्रम करने की जगह पर किए गए खुदाई की गई मिट्टी पत्थर को हटाया नहीं गया है।
वहीं नवघर उत्तरभारतीय छठ पूजा समिति के उपाध्यक्ष रोहित ठाकुर ने बताया कि मनपा के संबंधित अधिकारी द्वारा पानी में जाकर पूजा करने पर रोक लगाने की बात से भक्तों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जबकि छठ पूजा पानी में खड़े होकर किया जाता है। मनपा सार्वजनिक बांधकाम अधिकारी दीपक ख़ंबित का कहना है कि पानी में जाने से प्रदूषण फैलता है। इसलिए पानी में जाने की मनाही की जा रही है। जबकि मनपा अतिरिक्त आयुक्त पानपट्टे ने बताया कि मनपा प्रशासन द्वारा छठ पूजा स्थलों पर कृत्रिम तलाब बनाए गए है। ताकि लोगों को पूजा करने में आसानी हो, वैसे जेसल पार्क चौपाटी पर पानी में बेरीकेट लगाए जाएंगे, ताकि लोग पानी में जाकर सुरक्षित पूजा कर सके।
