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शनि प्रभाव कम करने के राशि अनुसार के उपाय

शीतल अवस्थी

ज्योतिष शास्त्र कहता है कि राशि अनुसार, कुछ रत्न, उपरत्न, उपाय और मंत्र जप करके शति देव के प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसे लेकर कुछ लोक मान्यताएं भी हैं। आइए जानते हैं-
मेष- सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें। शनि यंत्र के साथ नीलम या फिरोजा रत्न गले में लॉकेट की आकृति में पहन सकते हैं, यह उपाय भी उत्तम है। किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के मंत्रों के २३००० जाप करें या करवाएं। ॐ प्रां प्रीं स: श्नैश्चराय नम:। चींटियों को आटा डालें। जूते, काले कपड़े, मोटा अनाज व लोहे के बर्तन दान करें।
वृष- काले घोड़े की नाल या समुद्री नाव की कील से लोहे की अंगूठी बनवाएं। उसे तिल के तेल में रखें तथा उस पर शनि मंत्र का २३००० जाप करें। इसे धारण करें। यह अंगूठी मध्यमा (शनि की उंगली) में ही पहनें। किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के मंत्रों के २३००० जाप करें या करवाएं। ॐ ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:। शनिदेव का अभिषेक सरसो के तेल से करें व १०८ दीपकों से शनिदेव की आरती करें।
मिथुन- शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए ७ प्रकार के अनाज व दालों को मिश्रित करके पक्षियों को चुगाएं। बैंगनी रंग का सुगंधित रूमाल अपने पास रखें। शनिदेव के सामने खड़े रहकर दर्शन न करें, एक ओर खड़े रहकर दर्शन करें, ताकि शनिदेव की दृष्टि सीधे आप पर न पड़े। आज सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर मध्यमा उंगली में पहनें।
कर्क- प्रत्येक शनिवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद बड़ (बरगद) और पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक लगाएं और दूध एवं धूप आदि अर्पित करें। काले धागे में बिच्छू घास की जड़ को अभिमंत्रित करवा कर आज या किसी शनिवार को शुभ मुहूर्त में धारण करने से भी शनि संबंधी सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
सिंह- काली गाय की सेवा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। उसके शीश पर रोली लगाकर सींगों में कलावा बांधकर धूप-आरती करनी चाहिए। फिर परिक्रमा करके गाय को बूंदी के चार लड्डू खिला दें। हर शनिवार को उपवास रखें। सूर्यास्त के बाद हनुमानजी का पूजन करें। पूजन में सिंदूर, काली तिल्ली का तेल, इस तेल का दीपक एवं नीले रंग के फूल का प्रयोग करें। सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें। जूते, काले कपड़े, मोटा अनाज व लोहे के बर्तन दान करें।
कन्या- शनिवार को बंदरों व काले कुत्तों को लड्डू खिलाने से भी शनि का कुप्रभाव कम हो जाता है अथवा काले घोड़े की नाल या नाव में लगी कील से बना छल्ला धारण करें। एक दिन पहले काले चने पानी में भिगो दे। शनि जयंती के दिन ये चने, कच्चा कोयला, हल्की लोहे की पत्ती एक काले कपड़े में बांधकर मछलियों के तालाब में डाल दें। यह टोटका पूरा एक साल करें। इस दौरान भूल से भी मछली का सेवन न करें। किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के मंत्रों के २३००० जाप करें या करवाएं। ये है शनि का मंत्र- ॐ प्रां प्रीं स: श्नैश्चराय नम:। आज व प्रत्येक शनिवार को व्रत रखें। चींटियों को आटा डालें।
तुला- एक दिन पहले सवा-सवा किलो काले चने अलग-अलग तीन बर्तनों में भिगो दें। अगले दिन नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर शनिदेव का पूजन करें और चनों को सरसों के तेल में छौंककर इनका भोग शनिदेव को लगाएं और अपनी समस्याओं के निवारण के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद पहला सवा किलो चना भैंसे को खिला दें। दूसरा सवा किलो चना कुष्ठ रोगियों में बांट दें और तीसरा सवा किलो चना अपने ऊपर से उतारकर किसी सुनसान स्थान पर रख आएं। इस टोटके को करने से शनिदेव के प्रकोप में कमी आ सकती है। सवा किलो काला कोयला, एक लोहे की कील एक काले कपड़े में बांधकर अपने सिर पर से घुमाकर जल में प्रवाहित कर दें। सुबह किसी नदी में स्नान करने के बाद समीप स्थित किसी शनि मंदिर में जाकर शनिदेव की आरती करें। इसके बाद जरूरतमंदों का दान करें।
वृश्चिक- शनि यंत्र की स्थापना व पूजन करें। इसके बाद प्रतिदिन इस यंत्र की विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। प्रतिदिन यंत्र के सामने सरसों के तेल का दीप जलाएं। नीला या काला पुष्प चढ़ाएं। ऐसा करने से लाभ होगा। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर कुश के आसन पर बैठ जाएं। सामने शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें व उसकी पंचोपचार से विधिवत पूजन करें। इसके बाद रुद्राक्ष की माला से नीचे लिखे किसी एक मंत्र की कम से कम पांच माला जाप करें तथा शनिदेव से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें। यदि प्रत्येक शनिवार को इस मंत्र का इसी विधि से जाप करेंगे तो शीघ्र लाभ होगा। वैदिक मंत्र- ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:। किसी जरूरतमंद को काले कंबल व काले जूते का दान करें। छतरी का दान करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
धनु- किसी हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनि दोष की शांति के लिए हनुमानजी से प्रार्थना करें। बूंदी के लड्डू का भोग भी लगाएं। ११ साबूत नारियल बहते हुए जल में प्रवाहित करें और शनिदेव से जीवन को सुखमय बनाने के लिए प्रार्थना करें। प्रत्येक शनिवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद सरसों के तेल का दीपक लगाएं और दूध एवं धूप आदि अर्पित करें। सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें।
मकर- शमी वृक्ष की जड़ को विधि-विधान पूर्वक घर लेकर आएं। शनि जयंती के दिन किसी योग्य विद्वान से अभिमंत्रित करवा कर काले धागे में बांधकर गले या बाजू में धारण करें। शनिदेव प्रसन्न होंगे तथा शनि के कारण जितनी भी समस्याएं हैं, उनका निदान होगा। काले धागे में बिच्छू घास की जड़ को अभिमंत्रित करवा कर श्रवण नक्षत्र में या शनि जयंती के शुभ मुहूर्त में धारण करने से भी शनि संबंधी सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
कुंभ- बंदरों और काले कुत्तों को लड्डू खिलाने से भी शनि का कुप्रभाव कम हो जाता है। काले घोड़े की नाल या नाव में लगी कील से बना छल्ला धारण करें। शनि यंत्र के साथ नीलम या फिरोजा रत्न गले में लॉकेट की आकृति में पहन सकते हैं, यह उपाय भी उत्तम है। गहरे नीले रंग का सुगंधित रूमाल अपने पास रखें। शनिदेव के सामने खड़े रहकर दर्शन न करें, एक ओर खड़े रहकर दर्शन करें, ताकि शनिदेव की दृष्टि सीधे आप पर नहीं पड़े। हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। चोले में सरसों या चमेली के तेल का उपयोग करें और इन तेलों से ही दीपक भी जलाएं।
मीन- चोकर युक्त आटे की दो रोटी लेकर एक पर तेल और दूसरी पर घी चुपड़ दें। घी वाली रोटी पर थोड़ा मिष्ठान रखकर काली गाय को खिला दें तथा दूसरी रोटी काले कुत्ते को खिला दें और शनिदेव का स्मरण करें। एक कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर उसमें अपना मुख देखकर और काले कपड़े में काली उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, फल, काला कोयला और लोहे की कील रख कर डाकोत (शनि का दान लेने वाला) को दान कर दें। किसी हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनि दोष की शांति के लिए हनुमानजी से प्रार्थना करें। बूंदी के लड्डू का भोग भी लगाएं। किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के मंत्रों के २३००० जाप करें या करवाएं। ये है शनि का मंत्र- ॐ प्रां प्रीं स: श्नैश्चराय नम:

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