जेदवी
-अदालत में इंसाफ का सौदा
-क्लर्क गिरफ्तार, न्यायाधीश फरार
मुंबई में न्याय का सौदा करनेवाला मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मंगलवार को मझगांव सत्र न्यायालय के क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव को १५ लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस मामले में संलिप्त अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश इजाजुद्दीन सलाउद्दीन काजी फरार बताए जा रहे हैं। मामला एक पति-पत्नी के जमीन से जुड़ा हुआ है।
बता दें कि शिकायतकर्ता की पत्नी की कंपनी की जमीन पर वर्ष २०१५ में अवैध कब्जा हुआ था। इस संबंध में २०१६ में बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। बाद में हाई कोर्ट ने १० करोड़ रुपए से कम मूल्य के मामलों को मझगांव सत्र दीवानी न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया था।
मामले की सुनवाई न्यायाधीश इजाजुद्दीन सलाउद्दीन काजी की अदालत (कोर्ट नंबर १४) में चल रही थी। इसी दौरान अदालत के क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव ने शिकायतकर्ता से कहा कि मामला उनके पक्ष में करवाने के लिए २५ लाख रुपए देने होंगे। १० लाख रुपए खुद के लिए और १५ लाख रुपए न्यायाधीश के लिए।
शिकायतकर्ता ने मुंबई एसीबी में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद ११ नवंबर को जाल बिछाया गया। जब क्लर्क शिकायतकर्ता से १५ लाख रुपए स्वीकार कर रहा था, उसी वक्त एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद क्लर्क ने न्यायाधीश काजी को फोन कर बताया कि ‘काम हो गया’, यानी रिश्वत की रकम मिल गई।
एसीबी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश इजाजुद्दीन सलाउद्दीन काजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल, न्यायाधीश फरार हैं और उनकी तलाश के लिए कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या न्याय के मंदिर में अब इंसाफ भी बोली पर बिकने लगा है? मुंबई की अदालत में हुआ यह ‘रिश्वत कांड’ पूरे न्याय तंत्र पर बड़ा धब्बा बनकर उभरा है। इसके पहले हाल ही में दो न्यायाधीश पर भी यह आरोप लग चुका है।
क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव ने शिकायतकर्ता से कहा कि मामला उनके पक्ष में करवाने के लिए २५ लाख रुपए देने होंगे, जिसमें से १० लाख रुपए खुद के लिए और १५ लाख रुपए न्यायाधीश के लिए।
इसके बाद ११ नवंबर को जाल बिछाया गया और क्लर्क को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
फिलहाल न्यायाधीश की तलाश के लिए कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर न्याय तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह देखना होगा कि आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।
