मुख्यपृष्ठनए समाचाररोखठोक : भारतीय संस्कृति का खिलवाड़ ... सब बेनकाब हो गए!

रोखठोक : भारतीय संस्कृति का खिलवाड़ … सब बेनकाब हो गए!

संजय राऊत

देश से दिखावटी प्रेम करने वालों का शासन इस समय चल रहा है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की हालत सबसे ज्यादा दयनीय हो गई है। ‘वो मैं नहीं हूं’ जैसे खुलासे वे घूम-घूमकर कर रहे हैं। राहुल गांधी पर गोली चलाने की खुलेआम बात हो रही है। सोनम वांगचुक जैसे देशभक्तों को देशद्रोही बताकर संस्कृति और संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

महाराष्ट्र समेत पूरे देश में चल रहा एक भयावह खेल कब खत्म होगा? यह सवाल हर किसी के मन में है। दिल्ली पर ऐसे लोगों का राज है, जो अपने देश से सच्चे दिल से प्रेम नहीं करते। यह राज अंग्रेजों की तरह अमरपट्टा बांधकर नहीं आया है। इसलिए लोगों को आशावादी बने रहने में कोई दिक्कत नहीं है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ से लोगों को उम्मीदें थीं, लेकिन चंद्रचूड़ न्यायासन पर बैठकर भारतीय संविधान के भक्षक निकले। सुप्रीम कोर्ट में बैठकर वे प्रधानमंत्री मोदी और संघ का एजेंडा लागू कर रहे थे। मोदी को राजनीतिक रूप से मदद हो, ऐसे फैसले उन्होंने दिए। यह सब अब ‘एक्सपोज’ हो गया है और ‘मैंने वैसा नहीं किया’, ऐसा खुलासा करनेवाले साक्षात्कार देते हुए वे देशभर में घूम रहे हैं। चंद्रचूड़ सेवानिवृत्त हो गए। नवंबर में मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई सेवानिवृत्त हो जाएंगे, लेकिन संविधान से जुड़े कई मामले अनसुलझी अवस्था में पड़े हुए हैं। शिवसेना, शिवसेना के चुनावचिह्न, शिंदे गुट के अवैध दल-बदल और अवैध रूप से स्थापित की गई सरकार के बाबत अब तक तीन मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो गए। पैâसला कोई भी नहीं कर पाया। इसका मतलब सुप्रीम कोर्ट की मदद से भ्रष्टाचार को असीमित जीत मिल रही है। देश का सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट किस काम का है?
जनता के अधिकार
अदालतें निष्पक्ष नहीं रह गईं हैं, यह इस बीच पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ से लेकर सबने दिखा दिया है। इसलिए सत्ताधारियों की मनमानी बढ़ गई है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने पत्रकार अर्नब गोस्वामी की जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे रात में खोले और हत्या के आरोपी गोस्वामी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर जमानत दे दी। अपवादात्मक परिस्थिति में ही ऐसे पैâसले लिए जाते हैं, ऐसा चंद्रचूड़ कहते हैं। दिल्ली का छात्र नेता शरजील इमाम पांच साल से जेल में है। उस पर दिल्ली दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। उसकी जमानत याचिका पर पांच साल से सुनवाई नहीं हुई है। जब सुनवाई का समय आया, तब पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने यह मामला न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी को सौंप दिया। बेला त्रिवेदी गुजरात की लॉ सचिव थीं। वह मोदी की बदौलत न्यायाधीश बनीं। इसलिए वह सरकार विरोधी कोई भी रुख नहीं अपनातीं। बेला त्रिवेदी के समक्ष शरजील का मामला लाने और उसे जमानत देने से इनकार करने की पूरी व्यवस्था पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने की। आज सोनम वांगचुक को देशद्रोही घोषित कर मोदी सरकार ने जेल में डाल दिया है। शासक संविधान के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। कम से कम उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में तो ऐसा हो, इस उम्मीद पर भी पानी फिर गया है। श्री. उद्धव ठाकरे मराठवाड़ा में बाढ़ की स्थिति देखने वहां गए थे। उन्होंने पी. एम. केयर फंड का मुद्दा उठाया। यह पैसा कहां से आया और कहां जा रहा है, यह जानने का अधिकार अगर भारतीय जनता को नहीं है तो फिर किसको है? सोनम वांगचुक की स्वयंसेवी संस्थाओं को विदेशी धन मिलता है और उनके हिसाब में घोटाले हैं, इस आधार पर वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया, लेकिन पी. एम. केयर फंड के पैसों का क्या हुआ, यह देश को बताने के लिए सरकार तैयार नहीं है, इसका क्या मतलब है? विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने ढाई करोड़ महिलाओं के लिए ‘लाडली बहन’ योजना शुरू की और उन्हें १,५०० रुपए प्रति माह देने शुरू किए। अब बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ७५ लाख महिलाओं के खातों में १०-१० हजार रुपए जमा करा दिए हैं। यानी मोदी ने बिहार में वोट की कीमत १० हजार रुपए तय कर दी है। वोट खरीदने का यह तरीका निषेधार्ह है, ऐसा हमारे चुनाव आयोग को नहीं लगता और सुप्रीम कोर्ट भी ऐसे मुद्दों पर मौन रहता है। हमारा व्यवहार गलत है, ऐसा जिन्हें आज तक नहीं लगा, ऐसे लोग प्रधानमंत्री मोदी के रूप में बैठे हैं। मोदी के बाद उनके जैसा कोई दूसरा प्रधानमंत्री नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी के इर्द-गिर्द आज खुशामद करनेवाले लोग ज्यादा हैं। इसमें हमारे गृह मंत्री अमित शाह सबसे आगे हैं। मोदी कितना काम करते हैं, यह बताने में उनके चापलूस किस हद तक चले जाते हैं? श्री. अमित शाह एक इंटरव्यू में गर्व से कहते हैं, ‘‘शायद ही कोई ऐसा प्रधानमंत्री होगा, जो पार्टी की बैठक में डेस्क से उठकर फ्रेश होने भी नहीं जाता। तीन दिन की कार्यकारिणी चल रही है, तो तीन दिन पूरा वो सजग अवस्था में मंच पर पूरी कार्यवाही करते हुए बैठे मिलेंगे।’’ इसका मतलब यह है कि मोदी तीन दिन तक बैठे रहते हैं और बाथरूम तक नहीं जाते। बोलने वाले तो बोल देते हैं, लेकिन जिनके बारे में ऐसा बोला जाता है, उन प्रधानमंत्री को ऐसी बातों से तकलीफ कैसे नहीं होती? लेकिन ऐसी अपार मेहनत करनेवाले, काम करते हुए ‘फ्रेश’ भी नहीं होनेवाले प्रधानमंत्री मराठवाड़ा के बाढ़ पीड़ितों तक मदद पहुंचाने तक नहीं पहुंचे।
गांधी हत्या की धमकी!
प्रधानमंत्री मोदी बार-बार लोगों के सामने आकर रोने का ढोंग करते हैं। वो कभी खुद को, तो कभी अपनी मां को गालियां दिए जाने का झूठा शोर मचाते हैं। कोई भी चुनाव आए तो, उन्हें रोने का मन करता है, लेकिन देश के दूसरे नेताओं के बारे में जब भाजपा के लोग यही भद्दे शब्द इस्तेमाल करते हैं तो मोदी चुप हो जाते हैं। केरल के एक युवा भाजपा नेता ने एक टीवी चैनल पर हुई बहस में सार्वजनिक रूप से जो कहा, वह देश की संस्कृति और लोकतंत्र को झकझोर देने वाला है। भाजपा के पिंटू महादेवन ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सीने में गोली मारने की बात कही। देश के विपक्षी नेता और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को भाजपा पदाधिकारियों द्वारा सीने में गोली मारने की बात खुलेआम की जाती है और प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इसकी निंदा तक नहीं करते। यह राजनीतिक संस्कृति का पूर्ण पतन है। भाजपा के मन में वास्तव में क्या चल रहा है, यह ऐसे बयानों से स्पष्ट होता है। देश की सारी परंपराएं और संस्कार तोड़ दिए गए हैं।
फिर भी देश चल रहा है। यह और कब तक चलेगा?

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