बुलाकी शर्मा राजस्थान
म्हां सीनियर सिटीजन भोरान-भोर गांधी पार्क में मजमो लगावां। मॉर्निंग वॉक रै ओळावै घर यूं बारै निकळां। आपस में हथाई कर’र जीभ रा सळ काढ़’र सौरप मैसूस करां। घर में तो सगळां नै मौनी बाबो बण्योड़ो रैखणो पड़ै।
बठै म्हे घर-बिद सूं आखै बिरमांड तांई री बंतळ करता रैवां पण धन है धनजी नै वैâ बे गंभीर बण्या रैवै। बां री गंभीरता साम्हीं खुद गंभीरता ई लाजां मरै। बंतळ बिचाळै संभळ’र सबद खरचै, जाणै बांरो हरेक हरफ लाखीणो है।
ओमजी बात टोरी, ‘लोगां नै धन री धाप ई कोनी आवै। म्हारलो सेठ लारलै दिनां आपरै बेटे रो ब्याव मोटै आसामी री बेटी सूं करियो जणै अणथाग दायजो लियो। खुद करोड़ां में खेलै अर करोड़ूं रो दायजो लेय’र बो ओजूं कसर निकाळण में लाग्योड़ो है।’
सुखजी अफसोस करियो, ‘लारलै दिनां खबर आई ही वैâ मिनखां रै अनुपात में लुगायां री संख्या कमती है। छोरा कंवारा रैयसी जणै आं री अकल चांवैâसर आवैला।’
अबै धनजी रो गंभीर सुर सुणीज्यो, ‘दहेज री परंपरा सदियां सूं चालै। इण में गलत कांई है?’ रामा मास्टर बात रो पासो फोरियो, ‘अरे ओमजी, म्हारै स्कूल रो अेक मास्टर गोरमेंट कॉलेज में लेक्चरार आपरै बेटे रै ब्याव में दायजै रै नांव माथै फकत अेक रुपियो अर नारेळ लियो।’
बीं मास्टर रै इण क्रांतिकारी पैâसले री सगळा सरावणा करण लाग्या जणै धनजी रो गंभीर सुर सुणीज्यो, ‘परंपरा तोडू इसा मूरखां रो बॉयकॉट हुवणो चाइजै।’
अचंभै सूं सगळा धनजी साम्हीं देख्यो पण बड़क देय’र बां गंभीर मुद्रा धार लीनी ही।
हथाळी माथै अंगूठै सूं जर्दो-चूनो रगड़ता काळू म्हाराज बोल्या, ‘क्या जमानो आयग्यो है, धणी मार’र सती सावतरी रो नाटक करणआळी लुगायां री खबरां आयै दिन बांच रैया हां। घोर कळजुग आयग्यो भाईड़ा।’
‘साची वैâवो म्हाराज’, बिड़दोजी हंकारो भरियो, ‘पैला मिनख लुगायां नै पग री पगरखी मानता, बा पगरखी अबै बंदूक बणगी है।’
काळू म्हाराज वैâयो, ‘भाईड़ा, लाखां में अेक-दो रै करियोड़ी गलतियां खबर बण जावै पण मिनख बां साथै जिको अन्याव करतो आ रैयो है, बीं री गिणती ई कोनी कर सकां।’
धनजी रो फेरूं गंभीर सुर सुणीज्यो, ‘लुगाई लुकाई। पग री पगरखी। आ परंपरा निभावणी जरूरी।’
‘ई धनिये रो बॉयकॉट करो।’ काळू म्हाराज बिफरग्या, ‘परंपरा री ठौड़ माथै में गोबर भरियोड़ो है ईयेरै।’
धनजी गंभीरता हूं ऊभा हुय’र बठै सूं जावण लाग्या। म्हाराज पूछ्यो, ‘अबै किन्नै बळै?’
‘काळी माता मिंदर दरसण करण नै।’ पग आगै बधावता धनजी पडूतर दियो।
