-आरएसएस के प्रशिक्षित स्वयंसेवक व जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के रह चुके हैं कादीपुर में अगुवा
सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
रामनगरी अयोध्या के पड़ोसी जिले कुशभवनपुर (सुल्तानपुर) में आरएसएस के निष्ठावान, ओटीसी प्रशिक्षित पूर्व विधायक रामचंद्र चौधरी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी से नाता जोड़ लिया है।
यूं तो श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के वक्त से ही संघनिष्ठ चौधरी ने पूर्व में भी एक बार वर्ष 2010 के आसपास भाजपा को टाटा-बाय किया था और सपा के टिकट पर वर्ष 2012 में कादीपुर आरक्षित विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बनने में कामयाब हुए थे। लेकिन कुछ ही वर्षों बाद उनका सपा से मोहभंग हो गया था और उन्होंने वर्ष 2015 में पुनः भगवा झंडा थाम लिया। इसे उन्होंने उस वक्त अपनी ‘घर वापसी’ बताया था।
तब से लगातार वे भाजपा में थे। बेटे अंगद चौधरी को वे कादीपुर विधानसभा क्षेत्र की स्थानीय राजनीति में आगे बढ़ाते रहे, लेकिन वर्ष 2017 व 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा से उन्हें विधायकी का टिकट नहीं दिला सके।
अंततः वर्ष 2017 में चौधरी के बेटे अंगद ने सत्ता की सियासत में भागीदारी न कर पाने से मायूस होकर कादीपुर सीट से कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया, लेकिन जीत तो दूर, वे अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।
आखिरकार संघनिष्ठ रामचंद्र ने राम का नाम लेकर राजनीति कर रही पार्टी को पुनः टाटा-बाय कर दिया है। शुक्रवार को चौधरी ने लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के समक्ष बेटे के साथ समाजवादी पार्टी का झंडा थाम लिया। उन्हें उम्मीद है कि इस बार कादीपुर आरक्षित सीट से उन्हें या उनके बेटे अंगद को सपा तवज्जो देगी।
इधर, भाजपा से इस्तीफे की वजह बताते हुए पूर्व विधायक चौधरी ने यूपी शासन-प्रशासन में भ्रष्टाचार व्याप्त होने तथा जनसमस्याओं का निराकरण न किए जाने का आरोप सरकार पर लगाया।
