-डॉ. रवीन्द्र कुमार
अखबारों में एक खबर गरम है। पति बीवी की चप्पल की निगरानी करता रहा और बीवी प्रेमी के साथ फरार हो गई। अब इसे आप क्या कहेंगे? मैं कहता हूँ, समय रहते चप्पल वालों को ऐसी चप्पल बनानी चाहिए, जिसकी निगरानी न करनी पड़े। अब या तो ‘यूज़ एंड थ्रो’ चप्पल बनाई जाए, या फिर ऐसी चप्पल बनाई जाए जो पैर से उतारी ही न जा सके। इससे क्या होगा कि न उतारनी पड़ेगी, न निगरानी की ज़रूरत पड़ेगी। यह चप्पल उत्पादकों के लिए एक चैलेंज है। नहीं तो देख लो, आज ये उसकी बीवी, कल किसी और की भी हो सकती है।
दुनिया में प्रेम की नदी सूखी नहीं है और न ही प्रेमियों की पतवार। बताया जाता है कि पति-पत्नी अयोध्या मंदिर में दर्शन को गए थे। शायद यह तय पाया गया था कि पहले पत्नी दर्शन कर आए, तब तक पति चप्पल की निगरानी करेगा। अब राहुल (पति) को यह अंदाज़ नहीं था कि इसी अयोध्या नरेश की पत्नी सीता माता का अपहरण रावण ने छल से किया था। कभी गौतम बुद्ध अपनी पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल को रात में सोता छोड़ जंगल की तरफ चले गए थे और बुद्ध बन गए।
यह राहुल तो रोते-रोते अपने घर पर फोन से बता रहा था कि उसकी पत्नी चपलता से प्रेमी के साथ ये जा, वो जा हो गई और उसके हाथ रह गई है तो बस उसकी चप्पल। अब वह नगरी-नगरी, द्वारे-द्वारे चप्पल लिए ऐसे घूमेगा, जैसे कहानी में एक सैंडल लेकर प्रिंस सिंड्रेला की खोज में निकला था। वह सिंड्रेला को खोज लिया था। वह कहानी थी। यह कहानी नहीं।
राहुल को यह बात तब पता चली, जब आस-पास के लोगों ने हुलिया जानकर बताया कि इस महिला को एक नवयुवक के साथ जाते हुए देखा गया है। ‘प्रेमी’ की सुनवाई अयोध्या जाकर हो गई। फ्यूचर प्रेमियों और उनकी विवाहिता प्रेयसियों के लिए यह एक मिसाल भी हो गई है। अब टूर ऑपरेटर इसे भुना सकते हैं। इस प्रकार के प्रेमियों और उनकी प्रेयसियों के लिए विशेष पैकेज का ऐलान कर सकते हैं।
पतियों को सावधान हो जाना चाहिए। यदि पत्नी अयोध्या जाने की ज़िद करे, तो उनके कान खड़े हो जाने चाहिए। बेचारा पति किस-किस से बचे? प्लास्टिक के नीले ड्रम से बचे या नॉर्थ-ईस्ट के पहाड़ों की खाई से? इसी के चलते अब शादी ही अप्रासंगिक होती जा रही है। यूँ जो ‘लिव-इन’ में रह रहे हैं, उनकी भी क्या गति है! न जाने कब वे ‘लिव-इन’ से ‘डेड-आउट’ हो जाएँ, कुछ पता नहीं।
प्रेम के नाम पर इतने कांड प्रतिदिन हो रहे हैं। इस तरह के कांड शादी नाम की संस्था को मुँह चिढ़ा रहे हैं। इससे यह भी साबित होता है कि प्रेमी-प्रेमिका के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं। प्रेम में सब संभव है। यहाँ देखिए, कैसे चप्पल ने प्रेमी को प्रेमिका से मिलवाया है। इसी चप्पल की जोड़ी ने पति-पत्नी की जोड़ी की वाट लगा दी। चप्पल महिमा अनंत है। यह चप्पल का अनोखा नया रोल है।
फिल्म उपकार में जब लोगों में अभिनेता प्राण के नए अनोखे रोल की चर्चा फैली, तो लोगों में भयंकर जिज्ञासा हुई। फलस्वरूप टिकट खिड़की पर लोग टूट पड़े। यह कौन ब्रांड की चप्पल थी जी? राहुल को स्पष्ट करना चाहिए, या फिर ‘पत्नी-कम-प्रेयसी’ को बताना चाहिए, ताकि भावी प्रेमिकाओं का भी इस प्रकार अपने-अपने प्रेमियों से मिलन हो सके। यह काम ज़ाहिर है मिनटों में हो गया होगा, जैसे अंग्रेज़ी फिल्मों में रेस्क्यू ऑपरेशन दिखाते हैं।
अब राहुल यदि दोबारा घर बसाता है, तो मेरी राहुल को यह सलाह रहेगी कि अव्वल तो वह बीवी को लेकर अयोध्या क्या, किसी भी मंदिर में न जाए। यदि मंदिर जाना ही पड़े, तो चप्पल की निगरानी को न बैठे, ताकि चप्पल की जोड़ी जाती है तो जाए, उसकी जोड़ी सलामत रहे।
