श्रीकिशोर शाही
(सत्ता और सुंदरी-२)
रात की घटना के कुछ घंटों बाद अगले दिन सीमित दायरे में हलचल शुरू हो गई। अखबारों के एडिटोरियल्स में फुसफुसाहट तेज थी। खोजी पत्रकारों को कुछ ब्रेकिंग न्यूज की खुशबू आने लगी थी। सुबह एक प्रमुख ब्रिटिश टेब्लॉयड अखबार का दफ्तर खुलते ही संपादक ने अपने खोजी पत्रकार को हुक्म सुना दिया, ‘अंदर की सारी डिटेल्स चाहिए’। खोजी पत्रकार नाम निकल लाए। कुछ अजीब सा नाम था, पामेला बोर्डेस। शुरुआती रिकॉर्ड में वह एक मॉडल के रूप में सामने आई, जो कुछ समय से लंदन में रह रही थी, लेकिन उसके संपर्क साधारण नहीं थे। मॉडल, ग्लैमर, पॉलिटिक्स इन तीनों का एक बड़ा ही नशीला कॉकटेल तैयार हो रहा था।
मामला सत्ता में एक सुंदरी की घुसपैठ का लग रहा था। पत्रकारों की जांच-पड़ताल में पता चला कि पामेला पिछले कुछ महीनों से एक्टिव थी और कई प्रभावशाली लोगों के साथ वह निजी आयोजनों में देखी गई थी। आयोजन मतलब पार्टी। इन पार्टियों में शामिल लोगों की सूची आम तौर पर बाहर नहीं आती थी। पेज ३ का कांसेप्ट तभी आया नहीं था, मगर मामला कुछ कुछ वैसा ही लग रहा था।
दूसरी ओर, कुछ लोगों ने उसके रहने के स्थान और दिनचर्या की जानकारी इकट्ठा की। वह शहर के ऐसे इलाके में रहती थी, जहां किराया सामान्य आय वाले व्यक्ति के लिए संभव नहीं था। उसके खर्च और आमदनी के बीच अंतर साफ दिख रहा था। तो फिर उसके पास पैसा कहां से आ रहा था?
खोजी पत्रकारिता की टीम सूचनाएं जुटा रही थी। उसके संपर्कों की सूची तैयार की गई। कई नाम ऐसे थे, जिन्हें खुलकर जोड़ना आसान नहीं था। फिर भी, कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ती नजर आ रही थीं। कुछ मुलाकातें आधिकारिक नहीं थीं, लेकिन दर्ज थीं। इसी बीच, एक और जानकारी सामने आई। कुछ संवेदनशील जगहों पर उसकी मौजूदगी दर्ज हुई थी। सवाल यह नहीं था कि वह वहां क्यों गई, बल्कि यह था कि उसे वहां तक पहुंच वैâसे मिली? कुछ खबरें धीरे-धीरे लीक हुईं। हालांकि, खुला खुलासा नहीं हुआ, लेकिन इतना जरूर साफ था कि यह सिर्फ एक सामाजिक संबंधों की कहानी नहीं है। कुछ लोग इसे हल्का मामला मान रहे थे, लेकिन कुछ के लिए यह गंभीर संकेत था।
(शेष अगले अंक में)
