श्रीकिशोर शाही
(बुंगा बुंगा-७)
१९९० के दशक की शुरुआत में इटली एक ऐसे भयंकर राजनीतिक तूफान से गुजर रहा था, जिसने देश की पूरी पुरानी सत्ता को जड़ से उखाड़ फेंका था। ‘क्लीन हैंड्स’ नाम के एक विशाल और आक्रामक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने इटली की उन तमाम पुरानी, मजबूत और स्थापित राजनीतिक पार्टियों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था, जो दशकों से सत्ता पर काबिज थीं। इटली के बड़े-बड़े दिग्गज राजनेता या तो जेल की सलाखों के पीछे थे या फिर भारी भ्रष्टाचार के मुकदमों का सामना कर रहे थे। पूरे देश के भीतर एक भारी राजनीतिक शून्यता छा गई थी और निराश जनता एक नए ‘मसीहा’ की तलाश में थी। यह ठीक वह ऐतिहासिक पल था जब सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने अपना सबसे बड़ा, सबसे साहसिक और सबसे खतरनाक दांव खेलने का अंतिम पैâसला किया।
बर्लुस्कोनी को यह बात बहुत अच्छी तरह पता थी कि पुरानी सत्ता के पतन के बाद उनका अपना मीडिया और व्यापारिक साम्राज्य भी गहरे खतरे में है। खुद को, अपनी अपार दौलत और अपने टीवी चैनलों को बचाने का अब उनके पास केवल एक ही रास्ता बचा था, खुद सत्ता के सबसे ऊंचे सिंहासन पर काबिज होना। १९९४ की सर्दियों में, सिल्वियो ने टेलीविजन पर प्रसारित एक बेहद नाटकीय संदेश के जरिए राजनीति में अपनी एंट्री का ऐतिहासिक एलान किया। उनका वह बहुचर्चित बयान, ‘मैं इटली के मैदान में उतर रहा हूं,’ किसी पारंपरिक राजनेता का नहीं, बल्कि एक बेहद चतुर कॉर्पोरेट बॉस का बयान लग रहा था।
इस राजनीतिक खालीपन को भरने के लिए उन्होंने रातों-रात अपनी खुद की एक नई राजनीतिक पार्टी बना डाली और उसे एक लोकप्रिय फुटबॉल के नारे का नाम दिया, ‘फोर्जा इटालिया’, जिसका मतलब था ‘आगे बढ़ो इटली’। यह कोई सामान्य जमीनी राजनीतिक पार्टी नहीं थी, बल्कि यह मीडियासेट के वातानुकूलित बोर्डरूम में तैयार की गई एक परफेक्ट मार्वेâटिंग मशीन थी। बर्लुस्कोनी ने इस अभियान में अपने टीवी चैनलों की ताकत का पूरी बेरहमी से इस्तेमाल किया। उनके चैनलों के एंकर खुलेआम उनकी पार्टी का प्रचार कर रहे थे और उनके विज्ञापनों ने इटली के घर-घर में एक ‘नए इटली’ का सुनहरा सपना बेचना शुरू कर दिया।
सिल्वियो ने इटली की जनता से सीधा वादा किया कि जिस तरह उन्होंने ‘मिलानो २’ जैसे भव्य शहरों का निर्माण किया और अपनी फुटबॉल टीम को विश्व विजेता बनाया, बिल्कुल उसी तरह वह इटली को भी यूरोप का सबसे अमीर देश बना देंगे।
(शेष अगले अंक में)
