श्रीकिशोर शाही
२०१८ में कहानी ने वह मोड़ लिया, जहां से पीछे लौटना संभव नहीं था। डोनाल्ड ट्रंप का भरोसेमंद निजी वकील माइकल कोहेन अब खुद जांच एजेंसियों के घेरे में था। टैक्स चोरी, बैंक धोखाधड़ी और चुनावी नियमों के उल्लंघन जैसे आरोपों में वह फंस चुका था। इसी दौरान उसने स्वीकार किया कि अक्टूबर २०१६ में स्टॉर्मी डेनियल्स को दिए गए १.३० लाख डॉलर उसके निजी निर्णय नहीं थे। यह भुगतान ट्रंप के निर्देश पर किया गया था। अगस्त २०१८ में कोहेन ने अदालत में दोष स्वीकार किया और बाद में उसे जेल की सजा हुई। उसकी गवाही ने उस गोपनीय सौदे को आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बना दिया। अब मामला सिर्फ मीडिया रिपोर्ट या आरोपों तक सीमित नहीं रहा। दस्तावेज, बैंक ट्रांसफर और कंपनी की अकाउंट एंट्रियां जांच के दायरे में आ चुकी थीं। न्यूयॉर्क के अभियोजकों ने यह स्पष्ट किया कि वे शारीरिक संबंध या नैतिकता पर मुकदमा नहीं चला रहे हैं। उनका फोकस इस बात पर था कि पैसे की भरपाई को ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के रिकॉर्ड में वैâसे दर्ज किया गया। जांच में सामने आया कि कोहेन को लौटाया गया पैसा बार-बार ‘लीगल फीस’ के रूप में दिखाया गया, जबकि वास्तव में वह हश-मनी (चुप रहने के लिए दिया गया पैसा) की भरपाई थी। मार्च २०२३ में मैनहैटन के ग्रैंड जूरी ने डोनाल्ड ट्रंप पर अभियोग चलाने की सिफारिश की। अप्रैल २०२३ में उन्हें औपचारिक रूप से ३४ आपराधिक आरोपों में अभियुक्त बनाया गया। आरोप एक जैसे थे, पहली डिग्री में कारोबारी रिकॉर्ड को जानबूझकर गलत तरीके से दर्ज करना। यह अमेरिकी इतिहास में पहली बार था, जब किसी पूर्व राष्ट्रपति पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ।
मुकदमा २०२४ में शुरू हुआ। अदालत में दस्तावेज पेश हुए, पुराने ईमेल पढ़े गए और बैंक ट्रांसफर की टाइमलाइन रखी गई। स्टॉर्मी डेनियल्स ने गवाही दी और २००६ की घटना को विस्तार से दोहराया। बचाव पक्ष ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, लेकिन अभियोजन का तर्क साफ था कि मामला संबंध का नहीं, छिपाने का है। अदालत का माहौल तनावपूर्ण था। एक तरफ वह व्यक्ति बैठा था, जो कभी दुनिया के सबसे ताकतवर पद पर रहा था। दूसरी तरफ वे कागज थे, जो दिखा रहे थे कि चुनाव से पहले सच को वैâसे छुपाया गया। गवाही पूरी हुई, बहसें खत्म हुर्इं और पैâसला जूरी के हाथ में चला गया। अब कहानी अपने निर्णायक बिंदु के बिल्कुल पास थी।
(शेष अगले अंक में)
