श्रीकिशोर शाही
-(सत्ता में सुंदरी की घुसपैठ-१८)
मार्च १९८९ में ‘न्यूज ऑफ द वर्ल्ड’ के उस धमाके के बाद जो तूफान उठा, उसने केवल पामेला की दुनिया ही तबाह नहीं की, बल्कि ब्रिटिश सत्ता के सबसे मजबूत किले को भी हिलाकर रख दिया। हाउस ऑफ कॉमन्स के गलियारों में अब खौफ और घबराहट का माहौल था। यह सिर्फ एक खूबसूरत लड़की के एस्कॉर्ट होने की चटपटी खबर नहीं थी, यह ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा में एक ऐसी सेंधमारी थी जिसने पूरी सरकार के माथे पर पसीना ला दिया था।
जैसे-जैसे पामेला के रईस ग्राहकों और उनके संपर्कों की परतें उखड़ने लगीं, ब्रिटिश मीडिया और राजनेताओं को तुरंत १९६३ के उस कुख्यात ‘प्रोफुमो स्वैंâडल’ की याद आ गई। प्रोफुमो कांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब एक ब्रिटिश मंत्री और एक सोवियत जासूस के संबंध एक ही महिला क्रिस्टीन कीलर से थे। पामेला बोर्डेस का मामला हूबहू ‘प्रोफुमो पार्ट-२’ लग रहा था। एक तरफ पामेला के पास ब्रिटिश संसद का सुरक्षा पास था और वह टॉप ब्रिटिश सांसदों, मंत्रियों और संपादकों के साथ वक्त गुजार रही थी और दूसरी तरफ उसके तार सीधे लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के चचेरे भाई और खुफिया अधिकारी से जुड़े थे।
यह रहस्योद्घाटन ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ‘एमआई-५’ के लिए एक बेहद शर्मनाक तमाचा था। विपक्ष और मीडिया ने तत्कालीन मार्गरेट थैचर सरकार पर तीखे सवालों की बौछार कर दी। सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या दुश्मन देश लीबिया ने एक एस्कॉर्ट का इस्तेमाल कर ब्रिटिश संसद के भीतर अपना जासूस बिठा दिया था? बिना किसी पुख्ता पृष्ठभूमि की जांच के एक विदेशी महिला को संसद का अति-संवेदनशील वीआईपी पास आखिर किसने और वैâसे थमा दिया?
सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी में भारी हड़कंप मच गया था। जिन राजनेताओं और रसूखदारों ने कल तक पामेला के साथ हंस-हंसकर तस्वीरें खिंचवाई थीं और जाम टकराए थे, वे अब अपने-अपने करियर और इज्जत को बचाने के लिए छिपने की जगह तलाश रहे थे। पूरी ब्रिटिश सरकार बुरी तरह कांप उठी थी, क्योंकि पामेला के पास ऐसे कई राज हो सकते थे, जो कई बड़े राजनीतिक चेहरों को हमेशा के लिए बेनकाब कर सकते थे। इस खौफनाक तूफान को शांत करने और अपनी साख बचाने के लिए अब सरकार को तुरंत और बेहद सख्त कदम उठाने की जरूरत थी, और इस पूरी सियासी सफाई अभियान की सबसे पहली बलि खुद पामेला को ही बनना था।
(शेष अगले अंक में)
