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सनसनीखेज खुलासा…विदेशमंत्री के बेटे की संस्था को चीन से मिला डोनेशन!..लिस्ट में अजीत डोभाल की संस्था का भी नाम

-पूर्व में जयशंकर चीन में रह चुके हैं राजदूत

-दोनों ही संस्थाओं को माना जाता है थिंक टैंक

सामना संवाददाता / मुंबई

हिंदुस्थान के विदेश मंत्री के बेटे की संस्था को चीनी दूतावास से डोनेशन मिलने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस लिस्ट में अजीत डोभाल से जुड़ी एक संस्था का नाम भी सामने आया है। इन दोनों संस्थाओं को थिंक टैंक माना जाता है, जिन्हें वर्ष २०१७-१८ के बीच करीब २.७५ करोड़ का डोनेशन मिला है। एस. जयशंकर के बेटे का नाम ध्रुव जयशंकर है। ध्रुव को इस संस्था का निदेशक चुना गया था। बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर का चीन से पुराना नाता रहा है। वे पूर्व में चीन में राजदूत भी रह चुके हैं और अक्सर बेटे की संस्था में व्याख्यान देने जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि हिंदुस्थान के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बेटे ध्रुव जयशंकर से जुड़ी संस्था ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जुड़े ‘विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन’ को चीन से फंडिंग मिली है। इस तरह का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
सरकार ने साधी चुप्पी
अजीत डोभाल से संबंधित संस्था विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन को भी चीन की कई सरकारी और अकादमिक संस्थानों से वित्तीय सहायता मिली है। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्ष ने इस मामले की गंभीर जांच की मांग की है।
धु्रव जयशंकर बने निदेशक
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बेटे ध्रुव जयशंकर वर्ष २०२३ में अमेरिका से प्रेरित थिंक टैंक संस्था ‘ओआरएफ’ के निदेशक पद पर नियुक्त हुए। इसी संस्था को चीन से डोनेशन मिला है।
भाजपा सरकार का दोहरा चेहरा!
भाजपा सरकार की कथनी और करनी में बहुत फर्क है। एक तरफ तो वह चीनी सामान के बहिष्कार की बात करती है तो दूसरी तरफ सरकार की प्रमुख हस्तियों से जुड़ी संस्थाएं चीन से डोनेशन लेती हैं। इस खुलासे के बाद खासकर भारत-चीन सीमा विवाद और चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार की बहस के बीच यह मामला राजनीतिक हलकों में गर्मा गया है।
इस मामले को लेकर सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब एक ओर चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात हो रही है, तो दूसरी ओर खुद उच्च पदस्थ अधिकारियों से जुड़ी संस्थाओं को चीन से फंडिंग वैâसे मिल रही है?
इन संस्थाओं से मिली है फंडिंग
संस्थाओं की वेबसाइट पर जारी विवरण के अनुसार, चीन की संस्थाओं से वीआईएफ को फंडिंग मिली है। इन संस्थाओं के नाम बीजिंग की चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज, चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, पेकिंग यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज, कुनमिंग के यूनान यूनिवर्सिटी ऑफ फाइनेंस एंड इकोनॉमिक्स, बीजिंग के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्ट्रैटेजी, चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज, चेंगडू की सेंटर फॉर साउथ एशिया एंड वेस्ट चायना को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी, सिचुआन यूनिवर्सिटी की इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज, बीजिंग की सिल्क रोड थिंक टैंक नेटवर्क डेवलपमेंट रिसर्च काउंसिल और शेन्जेन की सेंटर फॉर इंडियन स्टडीज हैं। इन दोनों संस्थाओं को भारत का प्रमुख थिंक टैंक माना जाता है, जो सरकार की नीति निर्माण प्रक्रिया में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालते हैं।

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