आयुष्यमान खुराना के अपोजिट फिल्म ‘विकी डोनर’ की सफलता के बाद यामी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सफल होने के बावजूद यामी ने दर्जनों फिल्में साइन न करने की बजाय गिनी-चुनी ही फिल्में कीं। ‘दसवीं’, ‘आर्टिकल-३७०’, ‘उरी द सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘सनम रे’ जैसी फिल्मों में बतौर लीडिंग एक्ट्रेस काम कर चुकीं यामी की फिल्म ‘हक’ हाल ही में रिलीज हुई है। पेश है, यामी गौतम से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
फिल्म ‘हक’ की सफलता का श्रेय आप किसे देंगी?
मैं इसका श्रेय निर्देशक सुपर्ण वर्मा को देना चाहती हूं। फिल्म की कहानी ‘शाहबानो’ केस से प्रेरित है। १९८० में रिलीज हुई फिल्म ‘निकाह’ के बारे में लोग बातें किया करते थे, लेकिन आज ‘हक’ के बारे में बात करते हैं। ये ऐसी कहानियां हैं, जो समाज में बदलाव लाने के लिए मजबूर कर देती हैं। इस फिल्म की कहानी ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया है।
आपके लिए यह फिल्म क्यों प्रेरणादायी रही?
शाहबानो केस को ४० वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी उस ऐतिहसिक घटना को हम नहीं भूले हैं। एक्ट्रेस होने के नाते जब मुझे ऑफर मिला तो उस किरदार को न्याय दिलाना मेरा फर्ज था। मैंने निर्देशक से स्क्रिप्ट की हार्ड कॉपी मांगी। हार्ड कॉपी पर पढ़ने के बाद मैं स्तब्ध रह गई। स्क्रिप्ट को पढ़ने के बाद मैं भूतकाल में चली गई। जो उन दिनों अखबारों में पढ़ा था, वो कुछ-कुछ याद आने लगा था।
अगर फिल्म की कहानी विवादास्पद हो, क्या तब भी आप फिल्म करने में रुचि रखती हैं?
मुझे लगता है हर एक्टर के पास एक सशक्त अंतर्मन होता है, उसके जरिए वो यह जान लेता है कि फिल्म का निर्माण किस हेतु से किया जा रहा है। जाहिर सी बात है मुझे इतना समझ आता है कि फिल्म ‘हक’ के निर्माण का मकसद समाज में अच्छी सकारात्मक चर्चा लेने के लिए हो रहा है या महज विवाद पैदा करने के लिए? मुझे विवाद पसंद नहीं और न ही मुझे उसमें पड़ना अच्छा लगता है। मैं सेट पर जाती हूं और शूटिंग पूरी कर घर वापस लौट आती हूं। अगर फिल्म ‘हक’ पर कोई सामाजिक चर्चा नहीं हुई तो फिर फिल्म का कोई उद्देश्य नहीं होगा। मैंने जब ‘आर्टिकल-३७०’ की थी। दिल में एक डर था कि क्या इस फिल्म को लेकर विवाद होगा?
क्या आपकी शाहबानो से मुलाकात हुई है?
नहीं, यह तो मुश्किल हिस्सा था, लेकिन मैंने उनकी भावनाओं और सोच को समझा और महसूस किया। १९७० के दशक में शाहबानो खुद के लिए लड़ी, अपने बच्चों के अधिकारों के लिए लड़ी। बेहद साहसी स्त्री रही हैं वो।
आप इंडस्ट्री में किन बदलावों को महसूस करती हैं?
१५-१६ वर्ष पहले भी दर्शकों और इंडस्ट्री के लिए यह बात काफी मायने रखती थी कि फिल्म में काम करनेवाली नायिका की शादी हुई है या नहीं? क्या वो सिंगल है? क्या महिला कलाकार के बच्चे हैं? अब इंडस्ट्री और हमारे दर्शक ब्रॉड माइंडेड हो चुके हैं और उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बड़ा फर्क है। अब महिला कलाकार को रिस्पेक्ट फुल नजरों से देखा जाता है।
आप करियर और परिवार के बीच वैâसे संतुलन करती हैं?
मेरे पति, मेरे हमसफर, मेरे दोस्त हैं निर्देशक आदित्य धर। उनके साथ मैंने २०१९ में फिल्म ‘उरी द सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी। हमारी मित्रता हुई, एक-दूसरे के विचार, पारिवारिक बैकग्राउंड, संस्कृति, सोच-समझ एक से रहे। हमने २०२१ में शादी की और २०२४ में हम एक बेटे वेदविद के माता-पिता बने। चूंकि आदित्य इसी इंडस्ट्री से हैं, इसलिए जानते हैं कि इंडस्ट्री में फिल्मों से संबंधित काम अमूमन वक्त पर शुरू नहीं होता और खत्म होने में भी आगे-पीछे वक्त हो जाता है। यह सब सोचकर आदित्य और मैं दोनों मिलकर हमारे बेटे की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। साथ में उनके माता-पिता, आदित्य के निर्माता भाई लोकेश धर है। मेरे परिवार के भी सदस्य जुड़े हैं इसलिए कोई मुश्किलें नहीं आतीं और सुचारु ढंग से सब हो जाता है। लेकिन मैं ऐसा मानती हूं कि मैं पहले मां हूं, फिर मेरा काम है। मैं और आदित्य दोनों कमिटेड पैरेंट्स है। अगर मेरा बेटा ननिहाल में है, मेरा शूट मुंबई में है तो मैं फ्लाइट से चंडीगढ़ पहुंचती हूं और सुबह की फ्लाइट से सेट पर वापस भी आ जाती हूं। बच्चे के लिए कुछ वर्ष ये कर्त्यव निभाने होंगे।
आपकी आनेवाली फिल्में?
आनंद राय की हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘नई नवेली’ कर रही हूं। बहुत सारी फिल्में करनी भी नहीं हैं क्योंकि अब फोकस है मेरा बेटा।
