– अब सीधे सरकार के खाते में हर फीस
– स्वास्थ्य विभाग देगा हर खर्च का हिसाब
– पुराने पीएनडीटी फंड आदेश रद्द
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
शिंदे गुट के मंत्री पर शिकंजा कसने का नया फंडा सरोगेसी के नाम पर बुना गया है। इसकी परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। मातृत्व की आड़ में सरकार ने नए आर्थिक तंत्र की बुनियाद रख दी है, जहां सरोगेसी और सहायक प्रजनन तकनीक से जुड़ी हर फीस अब सीधे सरकार के दो नए खातों में जाएगी। स्वास्थ्य विभाग को अनुदान का तत्काल उपयोग करते हुए हर खर्च का हिसाब देना होगा, जबकि पुराने पीएनडीटी फंड आदेश को रद्द कर दिया गया है। तीन साल पहले लागू हुए सरोगेसी कानून को लेकर सरकार ने पारदर्शिता का दावा किया था, लेकिन अब तक यह मातृत्व से ज्यादा मोनेटाइजेशन का खेल साबित हो रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह पूरा तंत्र कागजी सुधार दिखाकर आर्थिक नियंत्रण और राजनीतिक दबाव का नया रास्ता खोलने के लिए रचा गया है।
बता दें कि महायुति सरकार ने सरोगेसी अधिनियम, २०२१ और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम, २०२१ के तहत नवीनीकरण और पंजीकरण शुल्क से प्राप्त राशि के लिए दो स्वतंत्र नए खाते खोलने की मंजूरी दे दी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी इस शासनादेश के अनुसार, अब स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा हर शुल्क सीधे सरकार के खाते में जमा होगा और विभाग को अनुदान लेकर प्रत्येक खर्च का ब्योरा देना होगा। सरकार ने घोषणा की है कि एक लेखा शीर्ष शुल्क जमा करने के लिए और दूसरा कानून के अमल, समिति बैठकों, कानूनी परामर्श, कार्यशालाओं व उपकरण खरीद जैसे खर्चों के लिए खोला जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम सरोगेसी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उठाया गया है, जबकि जनता ने इसे सरोगेसी की आड़ में फंड नियंत्रण का नया खेल करार दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तीन साल पहले लागू कानून का असली उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा था, लेकिन अब इसे आर्थिक तंत्र में बदल दिया गया है।
फंडा नहीं, फंड का जाल
विपक्ष ने इस निर्णय पर सरकार को सीधे घेरा है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि शिंदे गुट के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर पर शिकंजा कसने के लिए भाजपा ने नई चाल चली है। इसके तहत सरोगेसी कानून की आड़ में फंड ट्रांसफर का नया खेल खेला गया है। विपक्ष के मुताबिक, मातृत्व और महिला स्वास्थ्य के नाम पर बनाए गए इन खातों से केवल मंत्रालय के नेतृत्व वाले वर्ग को लाभ मिलेगा। अंदरखाने चर्चा है कि यह फंड मॉडल इसलिए लाया गया है ताकि स्वास्थ्य विभाग की वित्तीय गतिविधियों पर मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी बनी रहे।
हर विवरण होगा उपलब्ध
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अब तक पंजीकरण शुल्क विभिन्न खातों में बिखरा हुआ था, जिससे निधि उपयोग और पारदर्शिता पर सवाल उठते थे। नए फंड सिस्टम से सरोगेसी बोर्ड, कानूनी सलाहकार और जिला समितियों को समय पर राशि उपलब्ध कराई जा सकेगी। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुदान राशि का हर विवरण सरकार की वेबसाइट पर सार्वजनिक रहेगा और ऑडिट प्रक्रिया वित्त विभाग की देखरेख में होगी।
