मुख्यपृष्ठटॉप समाचारआज शिवसेना की जल्लोष महासभा!..उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर

आज शिवसेना की जल्लोष महासभा!..उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर

स्थान: एनएससीआई डोम, वर्ली

समय: सुबह ११ बजे

सामना संवाददाता / मुंबई

महायुति सरकार द्वारा राज्य की जनता पर जबरदस्ती त्रिभाषा नियम थोपने के रवैए के खिलाफ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मोर्चा खोल दिया था। शिवसेना के आक्रामक रुख को देखते हुए फडणवीस सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा और शिक्षा क्षेत्र में लाए गए जबरदस्ती के सरकारी आदेश (जीआर) को वापस लेना पड़ा। इस जीत को लेकर शिवसेना बड़े स्तर पर आज जल्लोष मनाएगी।
महायुति सरकार की जबरदस्ती पर ऐतिहासिक जीत का अभूतपूर्व विजय उत्सव वर्ली के एनएससीआई डोम में मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए हजारों शिवसैनिक महाराष्ट्र के कोने-कोने से ढोल-ताशों के साथ, गुलाल उड़ाते हुए और विजय पताकाएं लहराते हुए मुंबई पहुंच रहे हैं। सुबह ११ बजे यह जल्लोष का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। इस सभा में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे साथ होंगे। जनता की मजबूत एकता के लिए ठाकरे बंधु २० साल बाद एक साथ एक ही मंच पर आ रहे हैं, जिस पर पूरे देश की नजरें लगी हुई हैं। बता दें कि शिक्षा क्षेत्र में भाषा की जबरदस्ती के निर्णय को लेकर शिवसेना ने आक्रामक रुख अपनाया था। शिवसेना के तेवरों के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बैकफुट पर जाना पड़ा। बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर उन्होंने सरकार द्वारा निकाला गया जीआर रद्द करने की घोषणा की। जिसके बाद शिवसेना ने ५ जुलाई को वर्ली में विशाल जनसभा कर जल्लोष मनाने का ऐलान किया था।
महाराष्ट्र पर अन्याय के खिलाफ शिवसेना
महाराष्ट्र पर जब-जब संकट आया, तब-तब ठाकरे परिवार ने महाराष्ट्र को पुकारा और महाराष्ट्र के लोग एकजुट हुए, लड़े और भिड़े। इसका इतिहास गवाह है। हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने महारष्ट्र में लोगों पर होनेवाले अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए समाज में स्वाभिमान की अलख जगाई। तब महाराष्ट्र विरोधियों के खिलाफ पूरी ताकत के साथ खड़े रहनेवाले ठाकरे परिवार ही था और उन्होंने यह लड़ाई जीत भी ली।
महायुति सरकार झुकी
एक बार फिर महाराष्ट्र में महायुति सरकार की ओर से की जा रही जबरदस्ती और निर्णय थोपने की सख्ती के खिलाफ शिवसेना ने आवाज उठाते हुए कड़ा विरोध जताया। शिवसेना ने सरकार के उक्त निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विशाल जनसभा का ऐलान किया। जिसके बाद सरकार सकते में आई और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जबरदस्ती के निर्णय को रद्द किया। इस निर्णय के खिलाफ लोगों में उमड़ी नाराजगी के बाद एकजुटता ने सरकार के पैरों के नीचे की जमीन हिला दी। घबराकर फडणवीस सरकार ने यह निर्णय वापस लिया। सरकार की सख्ती के प्रति शिवसेना की जीत को लेकर जश्न का माहौल बन गया।

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