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पीएम के जन्मदिन पर जुमलों की बरसात … कंगाल सरकार ने छोड़े नई परियोजनाओं के शिगुफे!

-पुरानी योजनाओं को फंड नहीं, नई के लिए पैसा कहां से आएगा?
-मोदी भक्ति में महाराष्ट्र गुमराह

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की महायुति सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भक्ति में इस कदर डूब गई है कि उनके जन्मदिन पर योजनाओं की बौछार कर दी है। पीएम के जन्मदिन के अवसर पर राज्य सरकार ने कई योजनाएं लांच कीं। इस फेहरिस्त में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ का आगाज, राज्य के ३९४ नगर परिषदों व पंचायतों में नए ‘नमो उद्यान’ बनाने की घोषणा, ‘नमो पर्यटन कौशल विकास कार्यक्रम योजना’, १० लाख लोगों की नेत्र जांच के साथ ही दो अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा शामिल हैं। कहा जा रहा है कि इन योजनाओं पर राज्य सरकार की तिजोरी से सैकड़ों करोड़ रुपयों का वारा-न्यारा होगा।
सरकार ने जनता की असली समस्याओं से पूरी तरह आंखें मूंद ली हैं। इन योजनाओं पर सैकड़ों करोड़ लुटाए जा रहे हैं, जबकि कई क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा तक की सुविधा नहीं है। साफ संकेत है कि सरकार जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर राजनीतिक शोभा और मोदी भक्ति के लिए फंड बर्बाद कर रही है। इस बड़े पैमाने की परियोजनाओं को केवल प्रचार और चुनावी छवि चमकाने का हथकंडा कहा जा सकता है, जो यह दिखाता है कि महायुति सरकार वास्तविक विकास कार्यों की जगह सिंगल-लीडर पॉलिटिक्स में उलझी हुई है।
पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के औचित्य पर महाराष्ट्र में १७ सितंबर से दो अक्टूबर तक राष्ट्रीय अभियान ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ की शुरुआत की गई। बताया गया है कि अभियान के दौरान पूरे महाराष्ट्र में महिलाओं और बच्चों को विस्तृत स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा दी जाएगी। इसी तरह राज्य सरकार ने सभी नगर परिषदों और नगर पंचायतों में एक विशेष नया उद्यान विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रत्येक उद्यान पर एक करोड़ रुपए की निधि मंजूर की गई है। इन उद्यानों को ‘नमो उद्यान’ नाम देने की घोषणा की गई है। इसी के साथ ही ‘नमो पर्यटन कौशल कार्यक्रम’ भी सरकार चलाने जा रही है। इसके तहत ‘नमो पर्यटन सूचना व सुविधा केंद्र’ बनाया जाएगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ७५वें जन्मदिन के अवसर पर महाराष्ट्र द्वारा दी गई भेंट मानी जा रही है।

फंड की कमी से जूझ रही सरकार
-इस योजना के लिए भारी फंड आवंटित किया जा रहा है, जबकि कई शहरों और पंचायतों में बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा पर पर्याप्त फंड की कमी है।
-स्थानीय नागरिक और विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि इस योजना का राजनीतिक प्रचार और मोदी भक्तिभाव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
-जनता के वास्तविक जरूरतों की उपेक्षा करते हुए राज्य सरकार ने ३९४ करोड़ रुपए का खर्च केवल उद्यानों के लिए तय किया।

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