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उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की हार के संकेत…भाजपा को सता रहा है अविश्वास प्रस्ताव का डर!

-चंद्रबाबू समेत मोदी से नाराज भाजपा के कई सांसद कर सकते हैं क्रॉस वोटिंग

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के कारण रिक्त हुए उपराष्ट्रपति पद के लिए आगामी ९ सितंबर को वोट डाले जाने हैं। संसद के दोनों सदनों के आंकड़े देखने पर सत्ताधारी एनडीए भले ही अपनी जीत का दावा कर रहा है, पर जानकारों को कहना है कि चुनाव में बड़ा खेला हो सकता है। पीएम मोदी की तानाशाही से नाराज भाजपा के ही कई सांसद क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। ऐसे में एनडीए को हार का सामना करना पड़ सकता है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं। यही वजह है कि भाजपा को इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव का डर सता रहा है।
असल में नंबर गेम में भले ही फिलहाल एनडीए आगे दिख रही है, पर चंद्राबाबू नायडू के १६ लोकसभा सदस्यों के आंध्र अस्मिता के नाम पर ‘इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को वोट देने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा पीएम मोदी से नाराज भाजपा और एनडीए के ही कई सदस्यों के बारे में कहा जा रहा है कि वे क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। हाल ही में दिल्ली के कंस्टिट्यूशन क्लब के चुनाव में भाजपा के ही दो गुटों के बीच चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह समर्थित उम्मीदवार संजीव बालियान को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। शाह को मोदी का ही चेहरा माना जाता है। ऐसे में आम चर्चा है कि मोदी और शाह से नाराज भाजपा के ही कुछ सांसद उपराष्ट्रपति चुनाव में बड़ा खेला कर सकते हैं। इसी डर से मोदी ने अपने सदस्यों के लिए डिनर डिप्लोमेसी की है। बता दें कि एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि इंडिया गठबंधन से सुदर्शन रेड्डी मैदान में हैं। दोनों सदनों की संयुक्त क्षमता को अगर देखें तो वह ७८६ की है। हालांकि, इसमें कई सीटें रिक्त भी हैं।
दोनों सदनों में संख्या बल
लोकसभा में ‘इंडिया’ गठबंधन में कांग्रेस (१०२), सपा (३७) टीएमसी (२९), द्रमुक (२४), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) (९) और राकांपा (शरद चंद्र पवार) (८) बड़े दल हैं। एनडीए के २९३ सदस्यों में भाजपा (२४०), टीडीपी (१६) और जेडीयू (१२) बड़े दल हैं। बाकी छोटे-छोटे दल हैं, जिनमें अधिकांश के एक-दो सदस्य हैं। इसी तरह राज्यसभा में कांग्रेस (२७), द्रमुक (१०) राकांपा शरदचंद्र पवार (४) बड़े दल हैं, जबकि दूसरी तरफ भाजपा के ९६ सदस्य हैं।
‘इंडिया’ की जीत का गणित
लोकसभा में यदि इंडिया गठबंधन के पक्ष में चंद्राबाबू आते हैं और मोदी से नाराज २० सदस्य क्रॉस वोटिंग करते हैं तो यह संख्या बढकर २७३ हो जाती है। वहीं एनडीए की संख्या घटकर २५७ हो जाएगी। इसी तरह राज्यसभा में एनडीए के ११२ सदस्य हैं और ‘इंडिया’ के ८७ सदस्य हैं। अब यदि यहां भी एनडीए के १० सदस्य क्रॉस वोटिंग करते हैं तो एनडीए को १०२ और ‘इंडिया’ को ९७ वोट मिलेंगे। अब दोनों सदनों के वोट मिला दिए जाएं तो ‘इंडिया’ को ३७० और एनडीए को ३५९ वोट मिलते हैं। इनमें ११ वोटों का अंतर है। यदि राज्यसभा में मनोनीत सदस्यों में आधे एनडीए को वोट देते हैं तो भी एनडीए की जीत मुश्किल है।

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