-कचरे के ढेर पर रहने को मजबूर आदिवासी
-अधिवेशन में उठा ४६४ एकड़ जमीन हड़पने का मुद्दा
अनिल मिश्रा / कल्याण
कल्याण के कांबा गांव में ४६४ एकड़ आदिवासी जमीन हड़पने और आदिवासियों को बेदखल करने का मामला गरमा गया है। कल्याण तहसील के कांबा ग्राम पंचायत में नकली किसान बनकर आदिवासियों की जमीन पर उगे करीब दो हजार पेड़ों की कटाई को लेकर बवाल मचा है। इतना ही नहीं, आदिवासी परिवारों को उचित मुआवजा दिए बिना उन्हें बेघर करने का कुचक्र चलाया जा रहा है। अधिवेशन में यह मुद्दा उठने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।
‘परहित’ चैरिटेबल संस्था के अध्यक्ष विशाल गुप्ता की जानकारी पर यह खबर ‘दोपहर का सामना’ में प्रकाशित की गई थी। इसके बाद इस मामले को संज्ञान में लेकर विधायक अबु आसिम आजमी ने अधिवेशन में सवाल उठाए, जिस पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विभागीय कथित भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के बचाव में गोल-मोल जवाब दिए। जवाब को सुनकर आदिवासी व शिकायतकर्ता आश्चर्यचकित हैं। अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है।
शिकायतकर्ता ने लगाया आरोप
शिकायतकर्ता विशाल गुप्ता ने आरोप लगाया है कि कांबा ग्राम पंचायत में आने वाले करीब २५० आदिवासियों को बेघर किए जाने का षड्यंत्र विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। आदिवासियों को कचरा फेंकने के लिए आरक्षित की गई जगह पर बसाया जा रहा है। करीब ५० आदिवासियों में से सिर्फ तीन लोगों देवराम सुरोसे, शांताराम बनकरी व रामचंद्र कुंडले को मुआवजा दिया गया है, जबकि अन्य लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
न्याय नहीं मिला तो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
‘परहित’ संस्था के अध्यक्ष विशाल गुप्ता ने न्याय नहीं मिलने पर इस मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि ४६४ एकड़ जमीन है, जिसकी कीमत करीब दो हजार करोड़ रुपए है। इस जमीन का मामला जिलाधिकारी, प्रांत अधिकारी, कोकण भवन, तहसीलदार और उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। सरकार को आदिवासी समाज के सैकड़ों लोगों के जीवन को लेकर गंभीर होना होगा।
