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तड़का : कार्डियक टेंशन

कविता श्रीवास्तव
भारत में इन दिनों धड़ाधड़ हो रहे कार्डियक अरेस्ट की घटनाओं को लेकर गहमागहमी है। अनेक लोगों के प्राण इस कार्डियक अरेस्ट ने ले लिए हैं। कर्नाटक के हासन में तो बेहद दर्दनाक मामला हुआ है। वहां ४० दिन में कार्डियक अरेस्ट की २१ घटनाएं हुई हैं। इससे निश्चित तौर पर लोगों में दहशत है। लोगों में यह भी चर्चा है कि क्या कोविड वैक्सीन के कारण यह सब हो रहा है? हालांकि, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और एम्स ने अपनी जांच के बाद इस बात से इनकार किया है। लेकिन कर्नाटक की सरकार ने अपने राज्य में हुई कार्डियक अरेस्ट की घटनाओं पर विशेष निगरानी के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया है। कमेटी यह पता लगाएगी कि इतनी बड़ी संख्या में कार्डियक अरेस्ट क्यों हो रहे हैं? बीते दिनों हम सब ने देखा है कि कई लोग बैठे-बैठे, कुछ गाना गाते हुए, कुछ लोग खाना खाते हुए, कई तो स्टेज परफॉर्मेंस करते हुए और कुछ लोग दफ्तर में काम करते हुए या राह में चलते हुए अचानक कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुए और उनके प्राण तत्काल चले गए। मुंबई पुलिस में ही बीते ४ वर्षों में ७५ पुलिसकर्मियों की कार्डियक अरेस्ट से मौत हुई है। कुछ मामलों में तत्काल सही सीपीआर मिल जाने के कारण कुछ लोगों की जान बचाई भी गई। लेकिन ऐसे मौके पर सही सीपीआर देनेवाले लोग मिलने भी चाहिए और तत्काल अस्पताल पहुंचाने में देर नहीं होनी चाहिए। बड़ी संख्या में कार्डियक अरेस्ट का शिकार होकर लोगों की मौत होना वाकई बहुत बड़ी चिंता का विषय है। यदि आईसीएमआर और एम्स के निष्कर्ष को मान भी लिया जाए तो सवाल है कि बड़ी संख्या में कार्डियक अरेस्ट की घटनाएं क्यों हो रही हैं? इसके लिए एक्सपर्ट्स लोग हमारी जीवन पद्धति, हमारे खान-पान और हमारे रहन-सहन की आदतों को जिम्मेदार बताते हैं। लगातार तनाव होना भी इसका बहुत बड़ा कारण है। इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से यह जरूरी है कि लोग अपने आचार-विचार, व्यवहार में परिवर्तन लाएं। जीवन को सहज बनाएं। खान-पान पर विशेष ध्यान दें। साथ ही योगाभ्यास, शारीरिक कसरत, चलने-फिरने और तनाव मुक्त रहने पर विशेष ध्यान दें। समय-समय पर डॉक्टरों से परामर्श लेने से चूके नहीं। यह तो हम सब समझते ही हैं कि जब तक दिल की धड़कनें चल रही हैं तब तक हमारा जीवन भी चल रहा है। दिल की धड़कन ही थम जाएगी तो बात खत्म हो जाएगी। इसलिए स्वास्थ्य के प्रति चिंतित होने की बजाय खूब सतर्कता बरतने पर ध्यान रहना चाहिए। जीवन में सकारात्मक सोच, सामाजिकता और धार्मिव्ाâ-आध्यात्मिक उपक्रमों से जुड़ाव रखना हमें ऊर्जावान बनाता है। बेहद सरलता से रहना भी हमें तनाव से मुक्त करता है। तभी तो राजेश खन्ना का डायलॉग बार-बार याद आता है- ‘बाबू मोशाय, जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं। जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है, उसे न आप बदल सकते हैं, न मैं।’

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