कविता श्रीवास्तव
सूर्य की उपासना का पर्व छठ मनाने की लिए इन दिनों अनेक रेलवे स्टेशनों पर बिहार जानेवालों की कतारें लगी हैं। इससे रेलसेवा कुछ चरमराती सी दिख रही है और कुंभ जैसे हालात हो गए हैं। बिहार में विशेष लोकप्रिय आस्था का यह पर्व सामूहिक आयोजनों के कारण लोक उत्सव जो बन गया है। इस बार २५ अक्टूबर से २८ अक्टूबर तक छठ पर्व मनाया जाएगा इसीलिए बिहार जानेवाली ट्रेनों के लिए भारी भीड़ उमड़ी है। ट्रेनें खचाखच हैं। लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। दुखद है कि कर्मभूमि एक्सप्रेस से बिहार जा रहे तीन लोग नासिक के पास गिर गए, जिनमें दो की मौत हो गई। छठ के लिए अपने गांव पहुंचने की स्थिति जब जान पर बन जाए तो आस्थावानों को भी सोचना चाहिए। बेहतर होगा कि गांव जाना सुविधाजनक नहीं है तो जो जहां है, वहीं छठ मनाएं या जो लोग छठ मना रहे हैं उनके साथ हो जाएं। यहां मुंबई में भी समुद्री तटों तथा जलाशयों के आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मुंबई में दादर चौपाटी, जुहू बीच, मार्वे, पवई झील, आक्सा बीच, वर्सोवा बीच, नेशनल पार्क व अन्य कई स्थानों पर छठ पूजा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। खान-पान, शौचालय, कपड़ा बदलने के अस्थाई कमरे, वाहनों के ठहरने आदि की व्यवस्थाएं भी प्रशासन कर रहा है। इसलिए गांव पहुंचने की जिद करनेवालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जोखिमपूर्ण यात्रा उनकी या अन्य की जान पर न बन आए। छठ बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में प्रमुखता से मनाया जाता है। मैथिल, मगही और भोजपुरी लोगों का यह बड़ा पर्व है। यह सही है कि छठ का पर्व अपने परिवार और गांव के लोगों के साथ मनाना सुखद अनुभव देता है। यह प्रसंग परंपरा और भावनात्मक कारणों से भी महत्वपूर्ण है। अपने गांव के पारंपरिक माहौल का आनंद शहरों में संभव नहीं है। वहां अपनी यादों और जड़ों से जुड़ाव महसूस होता है। छठ पूजा की पारंपरिक विधि और उसके रीति-रिवाज बहुत खास हैं। गांव के पोखर या नदी किनारे पहुंचकर सामुदायिकता का हिस्सा बनने का आनंद ही कुछ और है। लोकगीतों के सुर, परिजनों का सानिध्य और ग्रामीण व्यंजनों का स्वाद कहीं और नहीं मिल सकता है। तभी तो गांव जाने की व्यक्तिगत और भावनात्मक उत्सुकता श्रद्धालुओं में है। हालांकि, मुंबई में भी छठ पूजा पर सार्वजनिक आयोजनों के साथ ही लोकल ट्रेनों, मेट्रो और बेस्ट बसों को भी देर रात तक चालू रखा जाएगा। लेकिन छठ पर बिहार जाने की हठ पर हजारों लोग डटे हुए हैं। दीपावली की छुट्टी और चुनावी माहौल भी है। किंतु, कष्टभरी यात्रा से बचने में ही समझदारी है।
