मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : काश, हम भी लंदन होते!

तड़का : काश, हम भी लंदन होते!

कविता श्रीवास्तव

हमारे देश में कहीं भी कचरा फेंकना, गंदगी करना और प्रदूषण पैâलाना बहुत ही साधारण सी बात है। पान-गुटखा खाकर मुंह में गुबार भरे लोगों के क्या कहने, कहीं भी पिचकारी दे मारते हैं। खांस-खांसकर थूकने वाले भी बड़ी संख्या में हैं। इसके अलावा ऐसे लोग हर जगह होते हैं जो कोई भी अपशिष्ट सड़क के हवाले कर देते हैं। सड़क पर गंदगी पैâले तो पैâले, यह किसी का घर तो नहीं है न! ऐसे लोगों के लिए लंदन की एक घटना अच्छा सबक है। पश्चिमी लंदन की रहनेवाली एक महिला को कॉफी के अवशेष सड़क की नाली में डालना इतना भारी पड़ा कि उन पर १५० पाउंड (लगभग १७ हजार पांच सौ रुपए) का जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत हुई। यह बात सारी दुनिया में वायरल हो गई। ऐसा कानून हमारे यहां भी है। मुंबई में थूकने वालों की धरपकड़ के लिए महानगरपालिका ‘क्लीन अप मार्शल’ नियुक्त करती है। हाल ही में कबूतरों से होनेवाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाए गए थे। पक्षियों को दाना डालने वालों की धरपकड़ हुई थी। प्रदूषण रोकथाम के नियम अन्य शहरों में भी है। लेकिन हमारे भारत में आम आदमी सार्वजनिक ठिकानों की स्वच्छता में अपनी भूमिका को लेकर उतना सक्रिय नहीं है, जितना उसे होना चाहिए। यह सभी जानते हैं कि गंदगी पैâलाने से पर्यावरण दूषित होता है, जल निकासी में बाधा आती है और बीमारियां पैâलती हैं। फिर भी बहुत लोग लापरवाही और आलस के कारण कहीं भी कचरा फेंक देते हैं। उन्हें इसके परिणामों की परवाह नहीं होती है। सड़कों पर कचरा फेंकना अपराध है। इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सामान्यत: लोग अपने घर को साफ रखते हैं, लेकिन कचरा बाहर फेंक देते हैं। सार्वजनिक जगहों को स्वच्छ रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाना नहीं चाहते। लोग सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने से डरते नहीं हैं, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता है कि यह एक अपराध है। कॉफी के बचे हुए हिस्से को नाली में फेंकना केवल लंदन में ही नहीं, भारत में भी पर्यावरण के लिए खतरा है। लेकिन हमारे यहां कॉफी छोड़िए सारे देश में आम सड़कों पर अवैध खोमचे और ठेलेवाले न जाने कितना प्रदूषण करते हैं। हाल ही में दीपावली बीती है और पटाखों ने भी खूब प्रदूषण पैâलाया। उधर दिल्ली में हाल इतना खराब है कि वह दुनिया के अव्वल प्रदूषित शहरों में गिना जाता है। भारत में सर्वाधिक प्रदूषण दिल्ली में है। पंजाब से पराली जलाए जाने से आनेवाला धुआं भी दिल्ली में प्रदूषण पैâलाता है। दिल्ली के बाद मुंबई ही इस समय सबसे प्रदूषित शहर है। यहां हवा में एक्यूआई ढाई सौ के ऊपर है। हालांकि, बढ़ती आबादी के कारण दिल्ली और मुंबई को सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में गिना जाता है। प्रदूषण पैâलाने वाले बेफिक्र हैं क्योंकि यहां लंदन की तरह सख्त कार्रवाई नहीं होती। काश, हम भी लंदन होते!

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