-निधि की कमी का हवाला देकर वित्त विभाग भर्ती प्रक्रिया में डाल रहा है बाधा
-११ हजार प्रोफेसरों के पद हैं रिक्त
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति ने विधानसभा चुनाव से पहले ‘लाडली बहन’ योजना की घोषणा की थी। इस योजना का असर अब सभी विभागों पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रोफेसरों के ५,०१२ पदों को भरने की मंज़ूरी दे दी है, लेकिन वित्त विभाग निधि की कमी का हवाला देकर भर्ती प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है। इसके चलते अगले साल विश्वविद्यालयों की राष्ट्रीय रैंकिंग में और गिरावट आएगी, ऐसी आशंका उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने व्यक्त की है। मंत्री चंद्रकांत पाटील ने पत्रकारों से उच्च शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की भर्ती में देरी के कारण राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में आ रही गिरावट पर चिंता जताई। राज्य में ८४ विश्वविद्यालय हैं, जिनमें १२ सरकारी विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन विश्वविद्यालयों से लगभग छह हजार कॉलेज संबद्ध हैं। सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लगभग ११ हजार प्रोफेसरों के पद रिक्त हैं। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने दो साल पहले इन पदों को भरने का निर्णय लिया था। लेकिन तत्कालीन राज्यपाल द्वारा महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के माध्यम से प्राध्यापकों के पदों को भरने के आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया रुक गई थी।
बता दें कि चंद्रकांत पाटील ने ५,०१२ सेवानिवृत्त प्राध्यापकों के स्थान पर नए प्राध्यापकों की भर्ती के लिए मंजूरी मांगी थी। लेकिन वित्त विभाग द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जा रही है, इसलिए प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है।
