-२,३०० केंद्र प्रमुख पदों की भर्ती भी लटकी
-सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शिक्षा विभाग में हड़कंप
सामना संवाददाता / मुंबई
सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। कोर्ट ने वर्ष २०१३ से पहले सेवा में आए राज्य में ४५-५२ वर्ष आयु वाले २० से २५ साल के अनुभवी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है। इस वजह से उनके करियर पर अब तलवार लटकती नजर आ रही है। दूसरी ओर इस वजह से राज्य में १०,००० शिक्षकों का प्रमोशन अटका है, दूसरी ओर २,३०० केंद्रप्रमुख पदों की भर्ती भी लटकी पड़ी है।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के पैâसले के बाद राज्य के १ लाख ६२ हजार शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। इनमें सबसे अधिक वे शिक्षक हैं, जो फरवरी २०१३ से पहले सेवा में आए थे और जिनकी आयु ४५ से ५२ वर्ष के बीच है। २०-२५ वर्षों का अनुभव रखने वाले इन शिक्षकों को अब न्यायालय के आदेशानुसार इस उम्र में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करनी होगी। खास बात यह है कि यह परीक्षा दो साल के भीतर पास करनी होगी। निर्धारित समय में परीक्षा न पास करने पर सख्त अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई होगी। इसी चिंता के बीच २३ नवंबर को होने वाली टीईटी परीक्षा के लिए राज्य में ५० हजार से अधिक शिक्षकों ने आवेदन किया है। इस बीच, रुकी हुई पदोन्नतियों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। केंद्रप्रमुख के लगभग २,३०० पद सीधी सेवा से भरने की योजना थी, लेकिन नियुक्ति के बाद भी उन्हें दो साल में टीईटी उत्तीर्ण करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में विभाग की राय है कि सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बाद ही भर्ती की जाए।
इन पर नहीं होता लागू
सरकारी नियमों के अनुसार केंद्रप्रमुख व विस्तार अधिकारी के कुछ पद शिक्षकों से ही भरे जाते हैं, जिसके लिए कम से कम छह वर्ष का अध्यापन अनुभव आवश्यक है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विस्तार अधिकारी बनने के बाद यह पद ‘टीचिंग वैâडर’ में नहीं आता, क्योंकि वे प्रशासनिक कार्य संभालते हैं। इसलिए इस पद पर टीईटी लागू नहीं होता। इस पर भी सरकार से मार्गदर्शन मांगा गया है और अधिकारियों का कहना है कि शीघ्र ही पदोन्नति की राह साफ होने की संभावना है।
बदलने पड़ सकते हैं नियम
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने आरटीई अधिनियम में शिक्षकों की पात्रता से जुड़े मानक तय किए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के पैâसले के बाद महाराष्ट्र सहित पूरे देश में लाखों शिक्षकों को दो साल में टीईटी पास नहीं करने पर नौकरी छोड़नी पड़ सकती है। इस पृष्ठभूमि में संभव है कि एनसीटीई को अपने पात्रता मानदंडों में बदलाव करना पड़े, ऐसा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है।
