५४ एमएलए को मिला ५-५ करोड़ का फंड विपक्ष का ‘महायुति’ सरकार पर हमला
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर वोट खरीद का मुद्दा गरमा गया है। विपक्ष ने महायुति सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि उसने सिर्फ सत्ताधारी दल के ५४ विधायकों को ही विकास फंड का ‘खोका’ पुरस्कार स्वरूप दिया है। प्रत्येक विधायक को ५-५ करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है, जबकि दूसरी ओर स्थानीय ठेकेदारों के ८० हजार करोड़ रुपए के बकाए अब तक लटके पड़े हैं। विपक्ष का कहना है कि यह पैसा विकास के लिए नहीं, बल्कि आगामी चुनावों में वोटों की खरीद के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के इस एकपक्षीय रवैए पर विपक्ष के नेताओं, खासकर राकांपा (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार और कांग्रेस नेता सतेज पाटील ने तीखे आरोप लगाते हुए कहा है कि यह कदम लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार ही नहीं, बल्कि वोटों की खरीद का खुला खेल है।
विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सत्ता में बने रहने के लिए यह निधि वितरण सिर्फ राजनीतिक निवेश है। विधायक रोहित पवार ने कहा कि जब राज्य में किसानों की हालत बदतर है, ठेकेदारों के बिल अटके पड़े हैं और बेरोजगारी चरम पर है, तब सत्ताधारी विधायकों को करोड़ों रुपए देना जनता के साथ विश्वासघात है। रोहित पवार ने कहा कि सरकार की यह नीति सिर्फ सत्ताधारी विधायकों को विकास फंड देना, लोकतांत्रिक सिद्धांतों का मजाक उड़ाने जैसा है। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार से समान न्याय की अपेक्षा करना वैसा ही है जैसे किसी गुंडे से सदाचार का प्रवचन सुनना है। उन्होंने ‘एक्स’ के माध्यम से कहा कि यह पैसा विकास के नाम पर नहीं, बल्कि स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनाव में वोट खरीदने की राजनीतिक चाल है। उनकी टिप्पणी `यह कदम विकास नहीं, वोटों की खरीद का नया मॉडल है’ ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस नेता सतेज पाटील ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने पद ग्रहण करते वक्त भेदभाव न करने की शपथ ली थी, मगर निधि रोकना उसी शपथ का अपमान है।
लोकतंत्र की
उम्मीद बेमानी
रोहित पवार ने अपने ‘एक्स’ में लिखा कि मध्यमवर्गीय स्थानीय ठेकेदारों के ८० हजार करोड़ रुपए बकाया चुकाने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं, लेकिन सत्ताधारी दल के ५४ विधायकों को प्रत्येक को ५ करोड़ रुपए देने के लिए सरकारी तिजोरी खुल जाती है। विकास निधि के नाम पर सार्वजनिक धन का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है, जो जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है।
