सुनहरा भविष्य सिर्फ एक जुमला, सरकार को नागरिकों की समस्याओं से नहीं कोई लेना-देना
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर डीपी योजना में व्याप्त खामियों को लेकर हाई कोर्ट में महायुति सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है। यह याचिका हाई कोर्ट के आदेश का पालन न करने को लेकर दायर की गई है, इसे लेकर राजनीतिक गलियारे में खलबली मच गई है।
सुनहरे भविष्य का खोखला सपना दिखाकर महाराष्ट्र पर मनमानी तरीके से राज कर रही महायुति सरकार जनता की समस्याओं के प्रति कितनी लापरवाह है, उसका एक और ताजा मामला सामने आया है। मीरा-भायंदर शहर की संशोधित विकास योजना में खामियों से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को ३० नवंबर २०२५ तक निर्णय लेने का स्पष्ट निर्देश दिया था। हालांकि, न्यायालय के आदेशों का पालन न करने के कारण, १३ जनवरी को याचिकाकर्ताओं द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है। ऐसी जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता विकास सिंह, अमित शर्मा और राकेश राजपुरोहित ने दी, जिन्होंने मीरा-भायंदर शहर के लिए तैयार किए गए संशोधित विकास योजना (आरडीपी) में गंभीर प्रक्रियात्मक और कानूनी त्रुटियों के खिलाफ मुंबई हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एस. सी. घुगे और न्यायमूर्ति अश्विन बोबे ने महाराष्ट्र सरकार को इस मामले में ३० नवंबर तक निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
उचित प्रक्रिया का हुआ उल्लंघन
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया गया। अपनी दलीलों में याचिकाकर्ताओं ने कानूनी और पर्यावरणीय निहितार्थों पर प्रकाश डालते हुए ये आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा लगातार देरी, पारदर्शिता की कमी और मनमाने ढंग से निर्णय लेने की प्रवृत्ति साफ नजर आती है, जिससे उचित प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है।
ये हैं डीपी योजना की खामियां
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वर्तमान में शहर की जनसंख्या लगभग १३ लाख है, जो आनेवाले वर्षों में बढ़कर २५ से ३० लाख तक हो जाएगी, जबकि योजना सिर्फ २० लाख की आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके अलावा विकास योजना में जल आपूर्ति, डंपिंग ग्राउंड, टोल प्लाजा, १२ मीटर चौड़ी सड़कें, ३० मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कें, मेट्रो कार शेड, पार्किंग व्यवस्था, ट्रॉमा सेंटर, पशु अस्पताल, हेलीपैड, मेट्रो स्टेशन क्षेत्र में पार्किंग, पार्क, मैदान, स्कूल और सब्जी मंडियों के लिए पर्याप्त आरक्षण नहीं रखा गया है। सरकार द्वारा इन गंभीर त्रुटियों पर कोई ठोस निर्णय न लेने के कारण याचिकाकर्ताओं ने सरकार को पहले पत्र द्वारा अवगत करवाया, जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार और शहरी विकास विभाग के खिलाफ कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हमने मीरा-भायंदर शहर के अगले २५ वर्षों के विकास के लिए सरकार को ५० से अधिक व्यावहारिक और संभव सुझाव दिए थे। हालांकि, सरकार ने इन सभी सुझावों के साथ-साथ अदालती आदेशों को भी नजरअंदाज कर दिया। चाहे हम सत्ता में हों या विपक्ष में, शहर के हितों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है और वो हम करते रहेंगे।’
