सामना संवाददाता / नई मुंबई
भले ही नई मुंबई में मनपा चुनाव प्रचार खत्म हो गया है, लेकिन शिंदे-नाईक के बीच का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, इसे दबाने की कोशिश की जा रही है और बताया जा रहा है कि सब कुछ ठीक-ठाक है, लेकिन नतीजा सिफर नजर आ रहा है। गौरतलब है कि चुनाव की गहमागहमी में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और वन मंत्री गणेश नाईक के बीच टकराव पिछले कुछ दिनों से बढ़ता ही जा रहा था। एकनाथ शिंदे के पुत्र श्रीकांत शिंदे द्वारा नाम लिए बिना उन पर तीखी आलोचना करने के बाद नई मुंबई का राजनीतिक माहौल सचमुच गरमा गया है, जिसका सीधा असर दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं पर पड़ा है। पिछले दिनों सांसद श्रीकांत शिंदे ने गणेश नाईक पर अपरोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा था, ‘कुछ लोगों को उम्र से परेशानी होती है।’ इस बयान के चलते नाईक समर्थकों में नाराजगी पैदा हो गई थी। इस आलोचना का जवाब देते हुए वन मंत्री गणेश नाईक ने इतवार को घणसोली में भाजपा उम्मीदवारों की एक प्रचार सभा में पलटवार करते हुए कहा, ‘लोग कहते हैं कि मैं बूढ़ा हूं। लेकिन अपने पिता से कहो कि मेरे साथ चलें। देखते हैं कि क्या वो आधे घंटे तक चल पाते हैं?’ अगर मैं यह चुनौती हार गया, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।’ अपनी उम्र को लेकर हो रही आलोचना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे राजनीति में पूरी तरह सक्षम हैं। उनके आक्रामक रवैये ने चुनावी रैली में हलचल मचा दी। नतीजतन, यह स्पष्ट हो रहा है कि नगरपालिका चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य स्तरीय नेताओं की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गए हैं। नई मुंबई में पहले से ही विभिन्न विकास परियोजनाओं, स्थानीय मुद्दों और सत्ता बंटवारे को लेकर राजनीतिक संघर्ष चल रहा था। हालांकि, शिंदे पिता-पुत्र और गणेश नाईक के बीच इन व्यक्तिगत आलोचनाओं ने चुनाव प्रचार को एक नया मोड़ दे दिया है।
