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मीरा-भायंदर में अब मलबा माफिया एक्टिव! …जगह-जगह लगे मलबे के ढेर आंखें मूंदे बैठा है मनपा प्रशासन

सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर शहर में पानी माफिया के बाद मलबा माफिया के सक्रिय होने की खबर सामने आई है। शहर में इस समय निर्माण गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है और यही वजह है की मिट्टी, पत्थर, ईंटें और अन्य स्व्रैâप सहित सिमेंट-कंक्रीट (सीसी) के मलबे को अवैध रूप से सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम अनलोड करने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आलम ये है कि मीरा-भायंदर महानगरपालिका और राजस्व विभाग की अनदेखी और निष्क्रियता के कारण मलबा माफियाओं ने पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र जैसे- मैंग्रोव्ज बेल्ट, खाड़ियों, छोटी नदियों, आर्द्रभूमि (वेटलैंड), तटीय विनियमन इलाकों और नालों को अपना निशाना बनाने के बाद अब घोड़बंदर हाइवे के किनारों में अवैध डंपिंग शुरू करके दुर्घटनाओं को खुला न्योता दे रहे हैं, जिससे वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इस मलबे में ज्यादातर बिल्डरों और मनपा ठेकेदारों द्वारा क्रमश: पुरानी इमारतों और सड़कें तोड़ने (निर्माणाधीन सीसी रोड) के बाद निकलने वाली सामग्री शामिल है। सुनसान इलाकों में रात के अंधेरे में डंपरों में भरकर लाए गए मलबे को फेंक कर चालक गायब हो रहे हैं। वायु और जल प्रदूषण, बरसात के मौसम में बाढ़ के खतरे को बढ़ाने, पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाने के अलावा निर्माण कार्यों के मलबे से उड़ने वाली धूल के कारण शहर में एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियों के मरीज भी बढ़ रहे हैं। ‘दोपहर का सामना’ ने जब मनपा उपायुक्त सचिन बांगर से घोड़बंदर हाईवे पर होनेवाली अवैध मलबा डंपिंग के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि इस मामलें में संबंधित स्वच्छता निरीक्षक को उचित कार्यवाही करने के लिए आदेशित कर दिया गया है।
निष्क्रिय हैं मलबा निरोधक दस्ते
शहर में बढ़ते अवैध डंपिंग मामलों की रोकथाम हेतु मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने नवंबर-२०१७ में २र्४ े ७ मलबा निरोधक टीमों का गठन किया था।
हालांकि, डंपिंग के खतरे को नियंत्रित करने के प्रति उदासीनता और जानबूझकर की जा रही लापरवाही के आरोपों के चलते इन टीमों को कुछ ही महीनों बाद भंग कर दिया गया था।
सितंबर २०२४ में फिर से मनपा प्रशासन द्वारा सेनेटरी इंस्पेक्टर, सुपरवाइजर और सुरक्षा गार्ड सहित प्रत्येक में पांच सदस्यों वाली छह मलबा निरोधक टीमों का गठन किया। इस बार इन टीमों को गश्त करने वाले वाहनों और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध करा दिए गए।
अवैध डंपिंग पर नजर रखने, उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ संबंधित पुलिस थानों में आपराधिक मामले दर्ज कराने की जिम्मेदारी के साथ इन टीमों को जुर्माना लगाने और डंपर की परमिट रद्द करने हेतु कार्रवाई करने के अधिकार प्रदान की गए हैं, पर कुछ महीनों तक निगरानी रखने के बाद ये दस्ते भी कथित रूप से निष्क्रिय हो गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण पर पड़नेवाले दुष्प्रभावों के अलावा बेखौफ मलबा माफियाओं के कारण अब सड़कों और हाईवे पर गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा मंडराने लगा है और प्रशासन आंखें मूंदे किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।

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