-ठाकरे बंधु साथ आए, उन्हें देखा,
-आंखें हुईं नम, मन को मिली खुशी!
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में कल हुआ विजयोत्सव महाराष्ट्र के लिए एक स्वर्णिम क्षण साबित हुआ। इस सभा में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे दोनों भाई करीब दो दशकों के बाद एक साथ एक मंच पर आए। यह क्षण महाराष्ट्र को भावुक करनेवाला था। ठाकरे भाइयों को एक साथ देखकर लाखों आंखें नम हो गर्इं। बहुत दिनों से दिल में जो इच्छा थी, वह पूरी होते देख महाराष्ट्र के प्रत्येक नागरिकों का मन आनंदित हो उठा। महाराष्ट्र प्रेम का ‘डोम’ (सभागार) सीधे आसमान को छू गया।
त्रिभाषा सख्ती पर मराठी शक्ति के विजय के बाद ठाकरे बंधुओं ने विजयोत्सव का आह्वान किया था। इसी के चलते ‘ठाकरे आ रहे हैं…’ वाली घोषणा हर जगह पैâल गई। कल वह पल वास्तव में आ गया।
ठाकरे भाइयों को एक साथ देखने के उन स्वर्णिम क्षणों को अपनी आंखों में संजोने के लिए सभी व्याकुल थे। दोपहर लगभग १२ बजे विजयोत्सव शुरू हुआ। निवेदकों ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के आगमन की सूचना दी। ये दोनों भाई जब मंच पर आने लगे तो पूरे सभागार की लाइट्स बंद कर दी गर्इं, लेकिन इस दृश्य को देखने के लिए उतावले हुए लोगों ने अपने मोबाइल की टॉर्च जलाई। उत्सुकता जैसे-जैसे बढ़ती गई, सभागार में दोबारा रोशनी हुई और सामने से ठाकरे बंधु दोनों ओर से मंच पर आते हुए दिखाई दिए। दोनों ने ही मौजूद जनसागर को हाथ उठाकर और नमस्कार कर अभिवादन किया।
उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे के कंधे पर हाथ रखा और उपस्थित जनसमूह ने जोरदार उत्साह के साथ तालियों की गड़गड़ाहट और जयघोष किया। पूरा माहौल भावनाओं से सराबोर हो गया था। यह सब आंखों के सामने घट रहा था, फिर भी लोग मोबाइल वैâमरों में इस ऐतिहासिक क्षण को कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे। जब तक ठाकरे बंधु मंच पर आकर बैठ नहीं गए, तब तक तालियों की गूंज लगातार होती रही। जयघोष होते रहे थे। सभागार के बाहर भी वैसा ही माहौल था। घोषणाओं से पूरा वातावरण गूंज उठा था। इस सभा ने महाराष्ट्र के ठाकरे परिवार के प्रति प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव की गवाही दी।
उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे की पीठ थपथपाई
कल की सभा में मंच पर केवल दो ही कुर्सियां रखी गई थीं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों उन पर आसीन हुए। पूरा जनसमूह टकटकी लगाकर इन दोनों को ही देख रहा था। कार्यक्रम की शुरुआत के बाद दोनों भाइयों ने अपने-अपने भाषण दिए। दोनों ने ही अपनी खास ‘ठाकरी’ शैली’ में तीखे प्रहार किए। उनके भाषण के हर वाक्य पर भीड़ से जोरदार और स्वाभाविक प्रतिक्रिया मिल रही थी। राज ठाकरे ने पहले भाषण दिया। उनका भाषण समाप्त होने के बाद जब वे अपनी सीट पर जाकर बैठे तो उद्धव ठाकरे ने हाथ मिलाया और उनकी पीठ थपथपाई। उन्होंने कुछ कान में फुसफुसाया। दोनों के बीच हल्का-फुल्का हंसी-मजाक भी चला। बाद में अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने सार्वजनिक रूप से राज ठाकरे के भाषण की प्रशंसा की।
