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बिहार राज्य के वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों के आठ सत्रों का बकाया अनुदान भुगतान कर नियमित वेतनमान और पेंशन देने की घोषणा करे सरकार

अनिल मिश्र/पटना

बिहार राज्य के लगभग 1225 वित्त रहित अनुदानित डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, प्लस टू विद्यालय, उच्च एवं मध्य विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों के 2018 से 2026 तक यानी आठ सत्रों का बकाया अनुदान भुगतान करने तथा पटना उच्च न्यायालय की डबल बेंच के निर्णय के अनुसार राज्य के संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को नियमित वेतनमान और पेंशन देने की मांग सरकार से की गई है।

इस संबंध में मांग करने वालों में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता और संयोजक, बिहार राज्य वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थान शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ के प्रो. विजय कुमार मिट्ठू, संरक्षक पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार सिन्हा, प्रो. मदन कुमार शर्मा, प्रो. अश्विनी कुमार, प्रो. विश्वनाथ कुमार, बाबूलाल प्रसाद सिंह, विपिन बिहारी सिन्हा, राम प्रमोद सिंह, दामोदर गोस्वामी, टिंकू गिरी आदि शामिल हैं।

नेताओं ने कहा कि सूबे के मुख्यमंत्री ने अपने साढ़े अठारह वर्ष के कार्यकाल में राज्य के विभिन्न कर्मचारियों की लंबित मांगों को पूरा करने का कार्य किया है। इसी क्रम में वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों की लंबित मांगों, यानी आठ सत्रों का बकाया अनुदान देने तथा नियमित वेतनमान और पेंशन लागू करने के लिए मुख्य सचिव, बिहार सरकार के नेतृत्व में एक समिति का गठन भी किया गया है। हालांकि, समिति की रिपोर्ट अभी तक नहीं आने के कारण बकाया अनुदान का भुगतान नहीं हो सका है, जिससे कर्मचारियों में निराशा है।

नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने और उनके द्वारा जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़ने की चर्चाओं के बीच यह उनका अंतिम कार्यकाल माना जा रहा है। ऐसे में हजारों वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को उनसे काफी उम्मीदें हैं। मधेपुरा में उनकी समृद्धि यात्रा के दौरान शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों द्वारा ज्ञापन दिए जाने पर उन्होंने आश्वासन भी दिया था।

इस संबंध में नेताओं ने बताया कि सूबे के सभी 534 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज सुनिश्चित करने के लिए 213 ऐसे प्रखंडों में, जहां न तो सरकारी और न ही संबद्ध अनुदानित कॉलेज हैं, वहां राज्य सरकार जुलाई 2026 से डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा कर चुकी है। इससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है और कर्मचारियों में आशा जगी है कि सभी 534 प्रखंडों में एक समान रूप से डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को वेतनमान और पेंशन मिल सकेगा।

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