-‘बिना संघर्ष किए ही कुछ लोग काट रहे मलाई’
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति के सहयोगी दल दादा गुट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसी चर्चाओं को वरिष्ठ नेता छगन भुजबल के ताजा बयानों ने फिर हवा दे दी है। राज्यसभा की उम्मीदवारी नहीं मिलने के बाद से नाराज बताए जा रहे भुजबल ने एक बार फिर गुट के भीतर अवसरों के बंटवारे और नेतृत्व की कार्यशैली पर परोक्ष रूप से सवाल उठाए हैं।
मीडिया से बातचीत में भुजबल ने कहा कि पिछले २६ वर्षों में कई लोग मेहनत और संघर्ष के दम पर आगे आए हैं, लेकिन कुछ लोग बिना ज्यादा कष्ट किए भी आगे बढ़ जाते हैं। उनके इस बयान को गुट के भीतर कुछ नेताओं को मिली राजनीतिक तरजीह पर टिप्पणी मानी जा रही है।
भुजबल ने कहा कि राजनीति में सम्मान और महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि किसी नेता के पीछे कितने विधायक, सांसद और जनप्रतिनिधि खड़े हैं। उनका यह बयान पार्टी के अंदर शक्ति संतुलन और प्रभावशाली नेताओं की बढ़ती पकड़ की ओर इशारा माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में हर कार्यकर्ता महत्वपूर्ण होता है। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेदों के कारण कोई अपना घर नहीं छोड़ता, बल्कि अपनी बात रखता है। इस टिप्पणी को भी पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज करने और साथ ही अपनी नाराजगी दर्ज कराने के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, भुजबल राज्यसभा जाने के इच्छुक थे।
