– मौत से थर-थर कांपे रूस के राष्ट्रपति
– हैकिंग से बचने के लिए पुतिन का सर्विलांस सिस्टम किया बंद
एजेंसी / नई दिल्ली
ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी के चलते रूस की सुरक्षा एजेंसी एफएसबी ने ८ जून को पुतिन और उनके सबसे करीबी अधिकारियों की निगरानी करने वाले विशेष वैâमरा नेटवर्क के कुछ हिस्सों को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद कर दिया। रूस को आशंका है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और अत्याधुनिक साइबर तकनीकों की मदद से दुश्मन देश या हैकर इन वैâमरों के जरिए पुतिन की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल कर सकते हैं। साथ ही पुतिन को अपनी हत्या का डर सता रहा है।
हालांकि मास्को में लगे करीब ३ लाख सामान्य निगरानी वैâमरे पहले की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन पुतिन की सुरक्षा से जुड़े विशेष वैâमरा सिस्टम को सुरक्षा समीक्षा और तकनीकी जांच के लिए अस्थायी रूप से बंद किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई तकनीक अब इतनी उन्नत हो चुकी है कि वह लाखों घंटों की वीडियो फुटेज को बेहद कम समय में खंगाल सकती है। साधारण भाषा में पूछे गए सवालों के आधार पर भी किसी व्यक्ति की आवाजाही, मुलाकातों और सुरक्षा इंतजामों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां निकाली जा सकती हैं।
रूस में हाई अलर्ट
एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी अधिकारियों को डर है कि अगर कोई दुश्मन इस सिस्टम में घुसपैठ कर लेता है तो वह पुतिन और अन्य बड़े अधिकारियों की दिनचर्या और सुरक्षा पैटर्न का पता लगा सकता है।
एआई बना साइबर जासूसी का नया हथियार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब साइबर जासूसी का सबसे बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। एआई लाखों घंटों की वीडियो फुटेज और डेटा का तेजी से विश्लेषण कर किसी व्यक्ति की गतिविधियों, संपर्कों और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जुटा सकता है। यही वजह है कि कई देश अब अपनी डिजिटल सुरक्षा रणनीति की दोबारा समीक्षा कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आधुनिक एआई तकनीक वैâमरों को सिर्फ रिकॉर्डिंग डिवाइस नहीं रहने देती, बल्कि उन्हें एक बड़े डेटा सोर्स में बदल देती है।
