मुख्यपृष्ठटॉप समाचारफडणवीस सरकार मेहरबान...१०,००० गरीबों के घर डकार गए बिल्डर!

फडणवीस सरकार मेहरबान…१०,००० गरीबों के घर डकार गए बिल्डर!

-बड़े भूखंडों पर २० फीसदी घर निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य

-ये घर बिल्डर म्हाडा को सौंपते हैं, जिन्हें बाद में नागरिकों को दिया जाता है

-म्हाडा आपराधिक मामला दर्ज कराने पर कर रही है विचार

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई महानगर क्षेत्र में १,०२८ से अधिक बिल्डरों द्वारा २० प्रतिशत आवास योजना के तहत गरीब एवं निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित मकानों को सरकार को न देकर बिल्डरों द्वारा हड़पने का खुलासा हुआ है। सरकार के सुस्त रवैए से गरीबों को मिलने वाले घरों पर बिल्डरों ने डाका डाला है। इन परियोजनाओं से म्हाडा को लगभग १०,००० घर मिलने की उम्मीद थी, जिन्हें लॉटरी के माध्यम से आम नागरिकों को उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण हजारों गरीब परिवारों का सस्ते घर का सपना अधूरा रह गया है।
गौरतलब है कि म्हाडा अपने सभी बोर्डों के अंतर्गत अनेक श्रेणी के मकान बनाती है, जिसमें मुंबई के बाहर एमएमआर रीजन के अंतर्गत निम्न श्रेणी के अधिक मकान होते हैं।
क्या कहता है नियम?
यूडीसीपीआर (एकीकृत विकास नियंत्रण एवं प्रोत्साहन नियमावली) की धारा ३.८.२ के अनुसार, १० लाख से अधिक आबादी वाले महानगरपालिका क्षेत्रों में ४,००० वर्गमीटर से बड़े भूखंडों पर विकसित होने वाली परियोजनाओं में २० प्रतिशत आवास अत्यल्प एवं निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।
मनपा को सौंपना होगा घर
मनपाओं के माध्यम से बिल्डरों को घर सौंपने के लिए कहा जाएगा। यदि इसके बाद भी वे नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे। यदि म्हाडा इन १०,००० घरों को हासिल करने में सफल होता है तो आने वाली लॉटरी में हजारों परिवारों को सस्ते घर मिलने का रास्ता खुल सकता है।
गरीबों के घर का आरक्षण अनिवार्य!
१० लाख से अधिक आबादी वाले मनपा क्षेत्रों में ४,००० वर्गमीटर से बड़े भूखंडों पर विकसित होने वाली परियोजनाओं में २० प्रतिशत आवास अत्यल्प एवं निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। ये घर बिल्डरों द्वारा म्हाडा को सौंपे जाने होते हैं, जिन्हें बाद में लॉटरी के जरिए नागरिकों को दिया जाता है। ठाणे, नई मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, पनवेल, मीरा-भायंदर और वसई-विरार क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसी परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन कोकण मंडल को अब तक केवल ८ बिल्डरों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
म्हाडा द्वारा महारेरा में पंजीकृत परियोजनाओं के अध्ययन में पता चला कि एमएमआर क्षेत्र में १,०२८ बिल्डरों की ऐसी परियोजनाएं हैं, जिनसे करीब १०,००० घर प्राप्त हो सकते हैं। लेकिन बिल्डरों ने इन दस हजार घरों को दबा कर रख लिया है। इन घरों को हासिल करने के लिए म्हाडा के उपाध्यक्ष संबंधित कई मनपा आयुक्तों के साथ ऑनलाइन बैठक की है। लेकिन इसका कोई असर बिल्डरों पर नहीं पड़ रहा है। अगर बिल्डर ये घर म्हाडा को सौंपते है तो भारी संख्या में गरीबों को घर उपलब्ध हो सकता हैं। कोकण मंडल के मुख्य अधिकारी विशाल राठोड ने बताया कि पहले भी म्हाडा को घर न सौंपने वाले कई बिल्डरों के खिलाफ विभिन्न मंडलों में आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

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