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‘उत्तर प्रदेश का स्वतंत्रता संग्राम–अमेठी’ का भव्य लोकार्पण, इतिहास से प्रेरणा का संदेश

नई दिल्ली। किसी भी देश और समाज का इतिहास उसका दर्पण होता है, जिससे वर्तमान पीढ़ी को राष्ट्रहित में सकारात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। यह विचार अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा ने ‘उत्तर प्रदेश का स्वतंत्रता संग्राम–अमेठी’ पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ तथा वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का लोकार्पण भारत मंडपम, प्रगति मैदान में वाणी प्रकाशन के तत्वावधान में आयोजित एक गरिमामय समारोह में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान सांसद किशोरी लाल शर्मा ने अमेठी संसदीय क्षेत्र से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थानीय प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला।

‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष्य में लिखी गई इस कृति के लेखक एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राकेश पांडेय ने पुस्तक लेखन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि शोध के दौरान विभिन्न पुस्तकालयों, संग्रहालयों और गजेटियर सहित अनेक प्रामाणिक स्रोतों से तथ्यों का संकलन किया गया है, जिससे पुस्तक ऐतिहासिक दृष्टि से सुदृढ़ बन सकी।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अवकाश प्राप्त प्रोफेसर अंगद सिंह ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इतिहास लेखन तथ्याधारित होता है और विश्वसनीय तथ्यों का संकलन एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने पुस्तक में प्रस्तुत विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में सर्वस्व अर्पित करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी और अमर पंक्तियों—
“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा”—
को दोहराया।

डॉ. सिंह ने अमेठी जनपद के ऐतिहासिक संदर्भों के साथ-साथ अमेरिकी, फ्रांसीसी, रूसी और चीनी क्रांतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आंदोलनों से उपनिवेशवाद और गुलामी से मुक्ति के साथ स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का सार्वभौमिक संदेश मिलता है।

कार्यक्रम के सूत्रधार एवं संचालक प्रख्यात साहित्यकार डॉ. ओम निश्चल ने वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में इस पुस्तक की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अवधी के प्रसिद्ध कवि जमुई खां आज़ाद द्वारा शहीदों के सम्मान में रचित रचना—
“फूल टूटी जवान वतन के बरे,
शीश चरणन मा मैया झुकावत रहब”—
का सस्वर पाठ कर वातावरण को भावविभोर कर दिया।
वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली के संचालक अरुण माहेश्वरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में साहित्य, इतिहास और संस्कृति जगत से जुड़े अनेक विद्वान श्रोताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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