सुनील ओसवाल / मुंबई
देशभर में गैस आपूर्ति संकट और सरकारी उदासीनता का असर अब महाराष्ट्र के औद्योगिक इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। मुंबई, ठाणे, कल्याण, अंबरनाथ, उल्हासनगर और बोईसर सहित राज्य के विभिन्न एमआईडीसी क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय और गैस आधारित उद्योग बड़े पैमाने पर बंद हो रहे हैं। नतीजतन हजारों कामगार रोजगार छिनने के बाद अपने गांवों की ओर लौटने को मजबूर हैं।
औद्योगिक इकाइयों से जुड़े संगठनों का कहना है कि गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और आपूर्ति में कटौती के चलते उत्पादन लागत असहनीय हो गई है। कई इकाइयों ने या तो काम पूरी तरह बंद कर दिया है या शिफ्ट्स घटा दी हैं। इसका सीधा असर श्रमिकों पर पड़ा है, जिन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के घर लौटना पड़ रहा है।
ठाणे-बेल्ट के अंबरनाथ और उल्हासनगर में केमिकल, टेक्सटाइल और छोटे मैन्युपैâक्चरिंग यूनिट्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, वहीं बोईसर एमआईडीसी में प्लास्टिक और प्रोसेसिंग उद्योगों में कामकाज लगभग आधा रह गया है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे उद्योगों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
मुंबई और आस-पास के इलाकों में भी छोटे होटल, फूड प्रोसेसिंग और गैस पर निर्भर अन्य धंधों पर सीधा असर पड़ा है। कई छोटे उद्यमियों ने कारोबार बंद कर दिया है, जिससे रोजगार के अवसर तेजी से घटे हैं। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि सरकार सिर्फ आंकड़ों में विकास दिखा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर उद्योग और रोजगार दोनों संकट में हैं।
और गहरा सकता है संकट
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जल्द ही गैस आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह संकट और गहरा सकता है। इससे न केवल औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि शहरी अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ेगा। मजदूरों का पलायन इस बात का संकेत है कि रोजगार के अवसर सिकुड़ रहे हैं और सरकार की नीतियां जमीनी हकीकत से दूर हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार इस बढ़ते औद्योगिक और रोजगार संकट को संभालने के लिए तैयार है या फिर हालात और बिगड़ने का इंतजार किया जा रहा है?
