-सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
-विपक्ष ने नीतीश सरकार पर लगाया लापरवाही का आरोप
हर साल की तरह इस तरह भी देशभर में बड़ी ही धूमधाम के साथ छठ महापर्व मनाया गया, जो कि २५ अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू होकर २८ अक्टूबर को उषा अर्घ्य के साथ खत्म हुआ। इस दौरान बिहार से कई जिलों से हादसे की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें १०० से ज्यादा लोगों की पानी में डूबने के कारण मौत हो गई है। वहीं कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में राहत-बचाव की टीमें लगी हुई हैं। इस घटना ने एक बार फिर से बिहार की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। इन घटनाओं को लेकर विपक्ष ने भी बिहार की नीतीश सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
देश में सबसे ज्यादा ठाठ-बाट से बिहार में छठ महापर्व का आयोजन होता है। देश-विदेश के किसी भी कोने में करने गए बिहार के ज्यादातर मजदूर हर हाल में छठ पर अपने घर लौटते हुए और धूमधाम से छठ की तैयारियों से लेकर पूजा-पाठ में हाथ बटाते हैं। हालांकि, इस बार बिहार के ३० जिलों में १०६ लोगों की मौत हो गई। इनमें से कुछ घाट बनाने के दौरान डूब गए, तो कुछ की अर्घ्य देते समय जान चली गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई घाटों पर रात के समय बिजली व्यवस्था न होने से श्रद्धालुओं को सही दिशा का अंदाजा नहीं हो सका, जिससे हादसे बढ़े। वहीं विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि हर साल छठ पूजा के दौरान प्रशासनिक तैयारियों की बातें तो होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत रहती है।
