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‘महायुति’ का खजाना है खाली, फिर भी अफसरों को मिलेगा बाइक के लिए कर्ज!

-९ फीसदी ब्याज पर `३.४६ लाख का लोन

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

महाराष्ट्र सरकार का खजाना खाली है। फिर भी सरकार अफसरों को वाहन खरीदने के लिए कर्ज देने जा रही है। सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाला विधि व न्याय विभाग बाइक के लिए कर्ज देगा। विभाग ने मोटर वाहन क्रय अग्रिम योजना को हरी झंडी दी है, जिसके तहत सरकारी अफसरों और कर्मचारी अब नई बाइक खरीदने के लिए ३.४६ लाख रुपए तक का कर्ज प्राप्त कर सकेंगे। यह कर्ज ९ फीसदी वार्षिक ब्याज दर पर दिया जाएगा, जिसे ६० समान मासिक किस्तों में चुकाना होगा, जिसके तहत पहले ४८ किस्तों में मूलधन और शेष १२ किस्तों में ब्याज की वसूली होगी।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में जारी शासनादेश के अनुसार, यह योजना वित्त विभाग के ९ नवंबर २०२३ के पैâसले के तहत लागू की गई है और इसे मुंबई वित्तीय नियम १९५९ के प्रावधानों के अनुरूप संचालित किया जाएगा। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि बाइक अग्रिम सेवा काल में केवल एक बार ही दिया जाएगा और तय अवधि में राशि का उपयोग न करने पर पूरी रकम शासन को लौटानी होगी। साथ ही खरीदे गए बाइक की कीमत मंजूर अग्रिम से कम होने पर शेष राशि भी वापस करनी होगी। सरकार ने वित्तीय अनुशासन का हवाला देते हुए यह भी आदेश दिया है कि हर महीने की १० तारीख तक सभी कार्यालयों को व्यय समायोजन रिपोर्ट भेजनी होगी और बीम्स प्रणाली के तहत पूरे व्यय का हिसाब रखा जाएगा। इतना ही नहीं, शासन ने यह भी तय किया है कि इस अग्रिम का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्होंने कम से कम तीन वर्ष की सतत सरकारी सेवा पूरी की है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यह योजना अफसरशाही को संतुष्ट करने और चुनावी साल में महायुति सरकार की प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने का एक तरीका मानी जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता की भलाई के लिए नहीं, बल्कि अपने नौकरशाही नेटवर्क को खुश रखने के लिए खजाना खोल रही है।
राहत से ज्यादा बोझ
सरकार ने यह योजना कर्मचारियों के कल्याण के नाम पर पेश की है। लेकिन इस पर ९ फीसदी वार्षिक ब्याज वसूला जाएगा, यानी यह राहत कम, बोझ ज्यादा है।
ज्यादा नियम, कम सुविधा
योजना में इतने जटिल नियम जोड़े गए हैं कि लाभार्थी राहत के बजाय उलझ जाएंगे। खरीदी गई बाइक की कीमत अगर मंजूर अग्रिम से कम हुई, तो शेष राशि लौटानी होगी। बीमा सिर्फ सरकारी कंपनी से ही कराना अनिवार्य है।

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