-मुंबई के उद्यानों की करनी है देखभाल
-चहेती कंपनी को फेवर करने का आरोप
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति राज में गजब का भ्रष्टाचार चल रहा है। हालत यह है कि अपने चहेते के लिए टेंडर की शर्तें चुपचाप बदल दी जा रही हैं। इसी कारण पार्क व मैदानों की देखभाल करने के लिए ३०० करोड़ रुपयों का टेंडर सवालों के घेरे में है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस टेंडर के लिए १८ कंपनियों को पात्र ठहराया गया है। इसके बाद चहेते को फायदा पहुंचाने के लिए चुपचाप टेंडर की शर्तों में बदलाव कर दिया गया। हैरानी की बात है कि इस बात की खबर वरिष्ठ अधिकारियों को भी नहीं है। अन्य कंपनियों के विरोध के बाद अब पूरी प्रक्रिया रद्द होने की आशंका गहरा रही है, जिससे शहर के उद्यानों, मैदानों और क्रीड़ा स्थलों की देखभाल ठप पड़ने का वास्तविक खतरा सामने आया है।
बता दें कि मुंबई मनपा के उद्यान विभाग द्वारा अगले दो वर्षों के लिए उद्यान, मैदान, मनोरंजन स्थलों और खेल मैदानों की देखभाल के लिए जारी की गई लगभग ३०० करोड़ रुपए की निविदा की शर्तें और प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई हैं। इस प्रक्रिया को लेकर कुछ आपत्तियां उठाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि यह निविदा फिर से ३० से ३६ प्रतिशत कम दर पर बोली लगाकर काम हासिल करने की कोशिशों का हिस्सा है, जिससे काम की अपेक्षित गुणवत्ता और प्रशासनिक नियमों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस निविदा के लिए आवेदन करने वाली २० में से १८ कंपनियां पात्र घोषित की गई हैं। अब काम पाने की इच्छुक कंपनियों के लिए लगातार छह महीनों तक इसी तरह का काम करने का अनुभव अनिवार्य किया गया है। इस अनुभव की शर्त के कारण वही कंपनियां आसानी से पात्र हो रही हैं, जो पहले से ही यह काम कर रही हैं। इस वजह से निविदा प्रक्रिया में कुछ कंपनियों के संयुक्त हितों को लेकर शंका व्यक्त की जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि मनपा के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति लिए बिना निविदा की कुछ शर्तों में बदलाव किया गया।
नियमों का पालन जरूरी
पूर्व अतिरिक्त आयुक्त ने पहले भी ऐसी एक निविदा रद्द कर अमानत राशि जब्त की थी इसलिए अब भी इस प्रक्रिया में शामिल कंपनियों की अमानत राशि नियमों के अनुसार जब्त कर निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से दोबारा शुरू करने की मांग मनपा के ही कुछ अधिकारियों ने की है।
निविदा रद्द होने की संभावना
उद्यान विभाग की ओर से जारी की गई इस निविदा प्रक्रिया में कई जगह ठेकेदारों के पक्ष में लिए गए पैâसले स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में निविदा रद्द कर पुनर्विचार किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
