– आम लोगों को बना रहा निशाना
-आवाज बदलकर महिला टीचर से हुई १ लाख रुपए की ठगी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीकी अब सिर्फ काम आसान बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि ठगी और साइबर अपराधों में भी इस्तेमाल होने लगी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अपराधी एआई की मदद से आवाज बदलकर लोगों को धोखा दे रहे हैं और वित्तीय नुकसान कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तकनीक इतनी परिष्कृत हो गई है कि एआई से किसी परिचित व्यक्ति या अधिकारी की आवाज बनाई जा सकती है, जिससे शिकार को भरोसा हो जाता है कि वह किसी अपने से बात कर रहा है। साइबर ठगी का एक ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आया है, जहां स्कूल की महिला टीचर को बड़ी ही चालाकी से शिकार बनाया। दरअसल, इंदौर के लसुड़िया थाना क्षेत्र में साइबर स्कैमर्स ने एआई और वॉयस मॉड्यूलेशन टेक्नोलॉजी का सहारा लिया और बैंक खाते से रुपए उड़ा लिए। आवाज बदलने की इस तकनीक को एआई वॉयस क्लोनिंग कहते हैं।
बता दें कि एआई वॉयस क्लोनिंग का अब तक कई लोग शिकार हो चुके हैं, जिसमें साइबर स्कैमर्स आपके भाई, बहन, माता-पिता या किसी रिश्तेदार से मिलती-जुलती आवाज एआई से जनरेट करते हैं। इसके बाद वह इमरजेंसी बताते हैं और रुपए मांगते हैं। एआई वॉइज क्लोनिंग टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर स्कूल टीचर के पास एक साइबर स्कैमर्स की कॉल आई। कॉल करने वाले ने आवाज बदलकर उसके भाई की आवाज में बात की, जिससे महिला को जरा भी शक नहीं हुआ। साइबर ठग ने दोस्त की मदद करने का झांसा दिया। इसके बाद महिला से पैसों की मांग की, जिसके बाद महिला ने बताए गए खाते में एक लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। साइबर ठगी का खुलासा तब हुआ जब महिला ने अपने उस भाई को कॉल किया और तब उसे पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
