संकट में नागपुर का शीतकालीन विधानसभा सत्र
अभी तक नहीं मिला गत वर्ष का बकाया रु. १५० करोड़
सुनील ओसवाल / मुंबई
नागपुर में विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होनेवाला है। सरकार द्वारा इसकी तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। मगर इसके साथ ही सरकार के इस शीतकालीन सत्र के सामने एक संकट आ खड़ा हो गया है। इस कारण उसके हाथ-पांव फूल गए हैं।
दरअसल, ‘महायुति’ सरकार द्वारा पिछले वर्ष के नागपुर शीतकालीन अधिवेशन में किए गए कार्यों के १५० करोड़ रुपए से अधिक के बिलों का अब तक भुगतान नहीं किया गया है। इसी के विरोध में नागपुर के ठेकेदारों ने इस वर्ष के अधिवेशन से जुड़े सभी कार्य अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का एलान किया है। नागपुर कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक पिछली देनदारियां पूरी तरह चुकता नहीं होतीं, तब तक किसी भी अधिवेशन संबंधी कार्य को हाथ नहीं लगाया जाएगा। शासन ने इस वर्ष के शीतकालीन अधिवेशन के लिए लगभग ९४ करोड़ रुपए की निविदाएं जारी की हैं, और आगे मंडप निर्माण समेत कई बड़े कार्यों की निविदाएं जारी होने वाली हैं।
आर्थिक संकट में ठेकेदार
कुछ ठेकेदारों ने काम शुरू भी कर दिया था, परंतु पिछले अधिवेशन की देनदारियां लंबित रहने के कारण ठेकेदार आर्थिक संकट में फंस गए हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि न केवल नागपुर अधिवेशन के कार्यों का भुगतान अटका है, बल्कि बिजली ठेकेदारों को भी पिछले दो अधिवेशनों का भुगतान नहीं मिला है।
अंधकार में दिवाली
ठेकेदारों का कहना है कि शासन की उदासीनता के चलते उनके परिवारों की दिवाली अंधकारमय बीती। उन्होंने सरकार से तत्काल बकाया भुगतान की मांग करते हुए दो टूक कहा है, ‘अब भुगतान मिलने के बाद ही कोई काम शुरू होगा।’
बुधवार से काम ठप
बुधवार से नागपुर में शीतकालीन अधिवेशन से जुड़ी सारी तैयारियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। एसोसिएशन के अनुसार, यदि शासन ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो इसका सीधा असर अधिवेशन की व्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
